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‘ईगल्स नेस्ट’ में लगी आग, आगजनी के शक में एक गिरफ्तार

nidhi
25 Oct 2026 7:06 AM IST
‘ईगल्स नेस्ट’ में लगी आग, आगजनी के शक में एक गिरफ्तार
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‘ईगल्स नेस्ट’ में आग लगने से हड़कंप
बर्लिन: जर्मनी के बवेरिया प्रांत में एडोल्फ हिटलर और नाजी अधिकारियों के लिए बनाए गए पहाड़ी विश्रामस्थल ‘ईगल्स नेस्ट’ में भीषण आग लग गई। शुक्रवार, 23 अक्टूबर की रात लगी आग ने ऐतिहासिक इमारत को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों ने आगजनी के संदेह में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। ऊंचाई पर स्थित इस इमारत तक पहुंचने में दमकलकर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
जर्मन भाषा में ‘केहलस्टाइनहाउस’ कहलाने वाली यह इमारत दक्षिण-पूर्वी जर्मनी में ऑस्ट्रिया की सीमा के पास स्थित है। बवेरियन आल्प्स की पहाड़ियों में बना यह परिसर अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भौगोलिक स्थिति के कारण जाना जाता है। आग लगने के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य आपातकालीन सेवाओं को मौके पर भेजा गया। आसपास के क्षेत्रों से भी राहत दल बुलाए गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, लगभग 200 दमकलकर्मी और आपातकर्मी अभियान में शामिल हुए।
शुक्रवार रात अग्नि चेतावनी प्रणाली से घटना की जानकारी मिली। मौके की ओर बढ़ रहे राहतकर्मियों को दूर से ही आग की ऊंची लपटें दिखाई दे रही थीं। जब दमकल की टीम इमारत तक पहुंची, तब आग काफी फैल चुकी थी। पुलिस के शुरुआती बयान के अनुसार, परिसर के भीतर कोई व्यक्ति नहीं मिला। इस कारण जानमाल की स्थिति को लेकर प्रारंभिक चिंता कुछ कम हुई, लेकिन इमारत को बचाने के लिए अभियान जारी रखना पड़ा।
आग बुझाने के काम में सबसे बड़ी चुनौती वहां तक पहुंचना था। पहाड़ी रास्ता संकरा है और कई हिस्सों में सुरंगों से होकर गुजरता है। ऐसे मार्ग पर दमकल वाहनों तथा उपकरणों को घटनास्थल तक ले जाना आसान नहीं था। इसके साथ मौसम भी खराब हो गया। बारिश के बाद बर्फ गिरने लगी और तेज हवा चली। अधिकारियों के अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण रात में कई घंटे काम करने के बाद राहतकर्मियों को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा। घटनास्थल की ओर जा रहे अधिकारियों ने रास्ते में एक मोटरसाइकिल सवार को रोका, जो पहाड़ से नीचे की ओर जा रहा था। गिरफ्तार संदिग्ध 33 वर्षीय जर्मन नागरिक बताया गया है। उसका स्थानीय क्षेत्र से संबंध है, हालांकि वह वर्तमान में वहां नहीं रहता। जांच एजेंसियां आग लगने की परिस्थितियों और संदिग्ध की संभावित भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। गिरफ्तारी के बावजूद आग लगाने का उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। पूछताछ के दौरान संदिग्ध में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के संकेत मिले, जिसके बाद उसे मनोरोग चिकित्सा केंद्र भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांचकर्ता इमारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए संभावित राजनीतिक उद्देश्य की भी जांच करेंगे। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। पुलिस को शुरुआती जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता का संकेत नहीं मिला है।
‘ईगल्स नेस्ट’ समुद्र तल से लगभग 1,834 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पहाड़ी सड़क के अंतिम हिस्से से चट्टान के भीतर बनाई गई लिफ्ट के जरिए इमारत तक पहुंचा जाता है। सामान्य पर्यटकों के निजी वाहनों के लिए सड़क खुली नहीं रहती और दिन में विशेष बसों से लोगों को ऊपर पहुंचाया जाता है। इसकी दुर्गम स्थिति सामान्य दिनों में पर्यटन की विशेषता रही है, लेकिन आग के दौरान यही भौगोलिक स्थिति राहत अभियान के लिए बाधा बन गई। यह भवन 1938 में तैयार हुआ था और नाजी अधिकारियों तथा उनके अतिथियों के उपयोग के लिए बनाया गया था। हिटलर ने इसका कभी-कभार ही इस्तेमाल किया। इसे पास में स्थित उसके दूसरे निवास ‘बर्गहोफ’ से अलग समझना जरूरी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ‘ईगल्स नेस्ट’ को ऐतिहासिक इमारत के रूप में संरक्षित रखा गया। बाद के दशकों में यह पर्यटकों के लिए खुला स्थान बन गया।
वर्ष 1952 से यहां रेस्तरां और कैफे का संचालन होता रहा है। परिसर में एक प्रदर्शनी भी थी, जिसमें भवन के नाजी इतिहास की जानकारी दी जाती थी। आग के बाद नुकसान का पूरा आकलन करना बाकी है। गिरते मलबे के खतरे के कारण दमकलकर्मियों के लिए भीतर प्रवेश करना मुश्किल रहा। पहाड़ के नीचे स्थित ओबरसाल्जबर्ग दस्तावेजीकरण केंद्र आग से प्रभावित नहीं हुआ है। बवेरिया के गृह मंत्री योआखिम हेरमान ने इमारत के पुनर्निर्माण का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि इसे खंडहर की स्थिति में छोड़ने की योजना नहीं है। आगे की रूपरेखा स्थानीय अधिकारियों, इतिहासकारों और संरक्षण विशेषज्ञों से चर्चा के बाद तय होगी। भवन बवेरिया सरकार के स्वामित्व में है। फिलहाल प्राथमिकता घटनास्थल को सुरक्षित करने, नुकसान का आकलन करने और आगजनी के संदेह की जांच पूरी करने पर है।
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