विश्व

रूस की Kinzhal हायपरसोनिक मिसाइल का खौफ! अमेरिका ने अंतरिक्ष में किया ये काम

jantaserishta.com
2 July 2022 2:41 PM IST
रूस की Kinzhal हायपरसोनिक मिसाइल का खौफ! अमेरिका ने अंतरिक्ष में किया ये काम
x

न्यूज़ क्रेडिट: आजतक

नई दिल्ली: अमेरिका ने अपने आसमान को और सुरक्षित कर लिया है. अब अमेरिका के दुश्मनों की मिसाइल उनके हवाई क्षेत्र में घुस नहीं पाएगी. क्योंकि मिसाइलों पर अंतरिक्ष से नजर रखने के लिए अमेरिका ने दो गुप्त सैटेलाइट्स छोड़े हैं. बताया जा रहा है कि ये दोनों सैटेलाइट्स मिसाइल ट्रैकिंग का काम करेंगे. यहां तक कि चीन या रूस या उत्तर कोरिया हाइपरसोनिक मिसाइल भी लॉन्च करते हैं, तब भी अमेरिका के ये सैटेलाइट्स तुरंत इसकी जानकारी पेंटागन को दे देंगे.

ये दोनों सैटेलाइट्स एटलस-5 (Atlas-V) रॉकेट के जरिए फ्लोरिडा स्थित केप केनवरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किया गया. अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इस मिशन को USSF-12 नाम दिया है. रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज साढ़े चार मिनट के लिफ्टऑफ के बाद सेपरेट हो गए थे. इसके बाद सेंटॉर इंजन ने दो बार और बर्न किया. फिर दोनों सैटेलाइट्स को धरती से 35,900 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में तैनात हो चुके हैं.
दोनों सैटेलाइट्स में से एक का नाम है वाइड फील्ड ऑफ व्यू (WFOV) सैटेलाइट. यह अमेरिकी स्पेस फोर्स स्पेस सिस्टम कमांड (SSC) का टेस्टिंग प्लेटफॉर्म है जो नई पीढ़ी का मिसाइल सर्विलांस टेक्नोलॉजी है. दूसरे सैटेलाइट में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के कई टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर पेलोड्स हैं. इसे USSF-12 Ring नाम दिया है. दोनों ही सैटेलाइट्स में लगे यंत्रों यानी पेलोड्स की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
USSF-12 Ring को नॉर्थ्रोप ग्रुमन कंपनी ने बनाया है. इसमें छह अत्याधुनिक पेलोड्स हैं जिनका खुद का प्रोपल्शन सिस्टम है. यानी अगर इनपर कोई खतरा आता है तो ये अपनी ऑर्बिट खुद ही बदल देंगे. WFOV में छह फीट लंब इमेजिंग सेंसर लगा है. जिसे L3Harris टेक्नोलॉजी ने बनाया है. यह वही कंपनी है जिसने नासा के हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को लेंस और ऑप्टिकल यंत्र दिए थे. यानी इसके पास ऐसी तकनीक है जो दुनिया को बेहद स्पष्ट तरीके से देख सकती है. तस्वीरें ले सकती हैं. वीडियो बना सकती है.
रूस (Russia) कुछ दिन पहले एक एनीमेटेड वीडियो जारी किया था, जिसमें उसने अपने हाइपरसोनिक किंझल मिसाइल (Kinzhal Missile) से अमेरिका पर हमला करते विजुअल दिखाया था. माना जाता कि किंझल की गति ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा है. यह दुनिया के किसी भी कोने में हमला कर सकती है. इसकी रेंज में पूरी धरती आती है. अंतरिक्ष में तैनात वर्तमान टेक्नोलॉजी सिर्फ बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर सकती है. लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलों को नहीं कर सकती थी.
हाइपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक करने के लिए अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस ने ओवरहेड पर्सिसटेंट इंफ्रारेड प्रोग्राम (OPIR) बनाया. यह वर्तमान और अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक कर सकते हैं. यानी रूस की किंझल मिसाइल भी इनकी नजर से बच नहीं सकती.


jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story