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फेसबुक पोस्ट से परिवार को मिला ‘चा चा’ के जिंदा होने का पता, बाद में फिर दी गई इच्छामृत्यु

nidhi
29 Oct 2026 2:54 PM IST
फेसबुक पोस्ट से परिवार को मिला ‘चा चा’ के जिंदा होने का पता, बाद में फिर दी गई इच्छामृत्यु
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जॉर्जिया के एक परिवार को तब गहरा सदमा लगा, जब उन्हें महीनों बाद पता चला कि उनका चार साल का पग, 'चा चा', अभी भी ज़िंदा है। वह उसी वेटरनरी क्लिनिक के एक कर्मचारी के साथ रह रहा था, जहाँ परिवार उसे 'यूथेनेशिया' (इच्छा-मृत्यु) देने के लिए ले गया था। यह चौंकाने वाली बात एक फेसबुक पोस्ट के ज़रिए सामने आई। जब परिवार ने क्लिनिक से इस बारे में सवाल पूछा, तो पता चला कि बाद में उस कुत्ते को यूथेनेशिया दे दिया गया था।
इस घटना ने जॉर्जिया के कोवेटा काउंटी स्थित 'सेनियोआ एनिमल हॉस्पिटल' में कुत्ते के मामले को संभालने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पग के अंगों के फेल होने के बाद परिवार ने यूथेनेशिया का विकल्प चुना
'चा चा' की मालकिन, रेबेका बेलोते ने अपने प्यारे पालतू कुत्ते को यूथेनेशिया देने का मुश्किल फैसला लिया था। दरअसल, उसे 'डायबिटिक कीटोएसिडोसिस' (DKA) हो गया था, जो मधुमेह (डायबिटीज) से जुड़ी एक जानलेवा स्थिति है। इस बीमारी की वजह से उसके अंग फेल हो गए थे और उसे लंबे समय तक चलने वाले महंगे इलाज की ज़रूरत थी। बताया जाता है कि परिवार से कहा गया था कि 'चा चा' के इलाज में हर महीने हज़ारों डॉलर का खर्च आएगा, और इसके ठीक होने की भी कोई गारंटी नहीं थी।
लंबे इलाज और अनिश्चित परिणाम को देखते हुए, बेलोते ने वेटरनरी क्लिनिक की सलाह पर उसे यूथेनेशिया देने का फैसला किया।
परिवार ने कंसल्टेशन, जांच, यूथेनेशिया और अंतिम संस्कार (सामूहिक दाह-संस्कार) के लिए 716.50 डॉलर का भुगतान किया। उन्हें लगा कि प्रक्रिया पूरी हो गई है, और वे अपने चार साल के साथी को खोने के दुख के साथ क्लिनिक से चले गए।
यह फैसला बेलोते के परिवार के लिए बहुत दर्दनाक था, क्योंकि उनके बेटे का उस पग के साथ गहरा लगाव हो गया था।
'न्यूयॉर्क पोस्ट' के अनुसार, बेलोते ने अपने बेटे और पति के बारे में कहा, "दोनों के लिए ही यह बहुत मुश्किल था। मेरा बेटा उस कुत्ते से बहुत ज़्यादा जुड़ा हुआ था।"
फेसबुक पोस्ट से पता चला कि पग ज़िंदा और ठीक था
'चा चा' को यूथेनेशिया दिए जाने के महीनों बाद, बेलोते को एक फेसबुक पोस्ट मिली, जिसने उनके पालतू कुत्ते की किस्मत के बारे में उनकी सारी धारणाएं बदल दीं।
इस पोस्ट से पता चला कि वेटरनरी क्लिनिक के एक कर्मचारी ने 'चा चा' को यूथेनेशिया देने के बजाय अपने घर ले लिया था। बेलोते के अनुसार, उस कर्मचारी के पति ने पुष्टि की कि पग उनकी पत्नी के साथ रह रहा था और पूरी तरह स्वस्थ लग रहा था। इस खुलासे से परिवार हैरान रह गया। उन्होंने पैसे देकर कुत्ते के इलाज और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करवा ली थी, लेकिन अब वे यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि असल में उनके कुत्ते के साथ क्या हुआ था।
बेलोते के अनुसार, परिवार को तो यही बताया गया था कि कुत्ते को 'यूथेनेशिया' (दर्द रहित मृत्यु) दे दी गई है, लेकिन असल में वह उसके बाद भी कई महीनों तक जीवित रहा।
जब परिवार ने क्लिनिक से इस बारे में जवाब मांगा, तो मामला और भी दुखद हो गया। बताया जा रहा है कि क्लिनिक ने उस कर्मचारी से कुत्ते को वापस लिया और फिर उसे 'यूथेनेशिया' दे दिया।
इस बात का पता चलने पर बेलोते ने कुत्ते के साथ हुए इस बर्ताव पर गहरा गुस्सा जताया।
'न्यूयॉर्क पोस्ट' के अनुसार, बेलोते ने कहा, "उन्होंने एक स्वस्थ कुत्ते को मार डाला। यह बहुत ही घिनौनी बात है।"
मालिक ने जॉर्जिया वेटरनरी बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई
इस घटना के बाद, बेलोते ने 'जॉर्जिया स्टेट बोर्ड ऑफ वेटरनरी मेडिसिन' में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मांग की है कि 'चा चा' (कुत्ते) के मामले में जो कुछ भी हुआ, उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
परिवार ने एक मुश्किल मेडिकल फैसले के लिए वेटरनरी क्लिनिक पर भरोसा किया था और उन्हें वह प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था, जिसकी उन्होंने अनुमति दी थी। जब उन्हें पता चला कि क्लिनिक का एक कर्मचारी कुत्ते को अपने घर ले गया था और बाद में उसे मार दिया गया, तो उनका दुख और भी बढ़ गया।
इस मामले ने वेटरनरी केयर में पारदर्शिता और सही प्रक्रियाओं के महत्व की ओर भी ध्यान खींचा है, खासकर तब जब 'यूथेनेशिया' जैसा कोई बड़ा फैसला लिया जा रहा हो।
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