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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 30 हजार लोगों को बेदखली का आदेश

Ratna Netam
29 Oct 2026 3:47 PM IST
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 30 हजार लोगों को बेदखली का आदेश
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बलोचिस्तान : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में करीब 30 हजार लोगों को अपने पुश्तैनी घर खाली करने के कथित सरकारी आदेश को लेकर विवाद गहरा गया है। बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के मानवाधिकार विभाग 'पांक' (Paank) ने इस आदेश की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक अधिकारों और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। संगठन के अनुसार, कलात जिले के शूर पारोद क्षेत्र में रहने वाले लगभग 5,000 परिवारों को 30 अक्टूबर 2026 तक अपने घर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश प्रस्तावित सैन्य अभियान से पहले जारी किए जाने की बात कही गई है।क्वेटा, 29 अक्टूबर 2026। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित किए जाने की आशंका के बीच मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने 27 अक्टूबर को जारी बयान में कलात जिले के शूर पारोद इलाके में लगभग 30 हजार लोगों को अपने घर छोड़ने के आदेश की निंदा की।संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने सुरक्षा अभियान से पहले स्थानीय निवासियों को क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित लोगों में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और वर्षों से इस इलाके में रहने वाले परिवार शामिल हैं।
5,000 परिवारों को 30 अक्टूबर तक घर खाली करने का आदेश
पांक के अनुसार, कलात जिले के पहाड़ी शूर पारोद क्षेत्र में रहने वाले लगभग 5,000 परिवारों को 30 अक्टूबर तक अपने पुश्तैनी मकान खाली करने को कहा गया है।इस आदेश के तहत करीब 30 हजार लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।संगठन ने कहा कि इतने कम समय में हजारों परिवारों को दूसरी जगह स्थानांतरित करना गंभीर मानवीय संकट पैदा कर सकता है।विशेष रूप से उन परिवारों के लिए स्थिति ज्यादा कठिन हो सकती है, जिनकी आजीविका स्थानीय जमीन, पशुपालन और पारंपरिक व्यवसायों पर निर्भर है।हालांकि, प्रभावित लोगों की कुल संख्या और वास्तविक विस्थापन की स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।
सैन्य अभियान का हवाला देकर जारी किया गया आदेश
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों ने क्षेत्र में हथियारबंद लड़ाकों की मौजूदगी का हवाला देते हुए प्रस्तावित सुरक्षा अभियान से पहले लोगों को हटाने की बात कही है।अधिकारियों का दावा है कि संबंधित क्षेत्र की जमीन सरकारी है।बलूचिस्तान के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुहम्मद हमजा शफकात ने लोगों को निर्धारित समयसीमा के भीतर स्थानांतरित होने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।दूसरी ओर मानवाधिकार संगठन का कहना है कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी करने का आधार नहीं बन सकतीं।
पुश्तैनी जमीन छोड़ने से सांस्कृतिक पहचान पर खतरा
पांक ने अपने बयान में कहा कि बलूच समुदाय के लिए पुश्तैनी जमीन केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि उनकी पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।संगठन के अनुसार, कई पीढ़ियों से लोग इन क्षेत्रों में रहते आए हैं। यहां उनके परिवारों के घर, आजीविका के साधन और सामाजिक संबंध जुड़े हुए हैं।ऐसे में लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध हटाने से केवल आवास का नुकसान नहीं होगा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक जीवन पर भी असर पड़ सकता है।संगठन ने मांग की कि किसी भी सुरक्षा कार्रवाई के दौरान नागरिकों के अधिकारों और गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
राहत शिविरों की व्यवस्था पर उठाए सवाल
मानवाधिकार विभाग ने विस्थापित परिवारों के लिए प्रस्तावित राहत शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।संगठन ने सवाल उठाया कि हजारों लोगों को स्थानांतरित किए जाने की स्थिति में उनके रहने, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।पांक के अनुसार, प्रभावित समुदाय पहले से ही बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं।ऐसे में राहत शिविरों में लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट योजना जरूरी है।पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से शिविरों में भोजन, दवाइयों, टेंट और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन व्यवस्थाओं की पर्याप्तता का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध नहीं है।
सर्द मौसम में बढ़ सकती हैं लोगों की परेशानियां
कलात बलूचिस्तान के अपेक्षाकृत ठंडे इलाकों में शामिल है। सर्दियों की शुरुआत के समय हजारों परिवारों को अस्थायी शिविरों में स्थानांतरित करने से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैंपांक ने कहा कि यदि पर्याप्त आश्रय, गर्म कपड़े, हीटिंग और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।संगठन ने प्रशासन से पूछा कि प्रभावित परिवार कहां जाएंगे, उनकी आजीविका कैसे चलेगी और उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की क्या गारंटी होगी।
बलूचिस्तान नेशनल पार्टी ने भी जताया विरोध
इस मामले में बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (BNP) ने भी विरोध दर्ज कराया हैपार्टी ने 25 अक्टूबर को जारी बयान में हजारों लोगों को उनके घरों से हटाने की योजना तत्काल रोकने की मांग की थी।BNP ने कहा कि बलूचिस्तान में पहले से मौजूद असुरक्षा और सामाजिक समस्याओं के बीच बड़े पैमाने पर विस्थापन से लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।पार्टी ने प्रभावित परिवारों के जीवन, संपत्ति और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों का दिया हवाला
पांक ने संयुक्त राष्ट्र के आंतरिक विस्थापन संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को मनमाने विस्थापन से सुरक्षा मिलनी चाहिए।इन सिद्धांतों में विशेष रूप से उन समुदायों के अधिकारों पर जोर दिया गया है, जिनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान उनकी पारंपरिक भूमि से जुड़ी होती है।मानवाधिकार संगठन ने कहा कि सुरक्षा अभियानों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पाकिस्तान सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
बलूचिस्तान लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों, अलगाववादी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है।पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा अभियान सशस्त्र समूहों के खिलाफ चलाए जाते हैं, जबकि विभिन्न बलूच संगठनों ने ऐसे अभियानों के दौरान नागरिकों के प्रभावित होने के आरोप लगाए हैं।शूर पारोद में प्रस्तावित विस्थापन को लेकर भी यही विवाद सामने आया है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 30 अक्टूबर की समयसीमा से पहले प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, आवास और आजीविका के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। लगभग 30 हजार लोगों के संभावित विस्थापन के मामले में प्रशासनिक पारदर्शिता, नागरिक सुरक्षा और मानवीय सहायता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
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