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एनर्जी सीज़फ़ायर: जेलेंस्की का समर्थन, US से जानकारी का इंतज़ार

Tara Tandi
12 Oct 2026 12:17 PM IST
एनर्जी सीज़फ़ायर: जेलेंस्की का समर्थन, US से जानकारी का इंतज़ार
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वॉशिंगटन: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रविवार को कहा कि कीव, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित "एनर्जी सीज़फायर" (ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम) का समर्थन करता है और वॉशिंगटन से जानकारी का इंतज़ार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस को भी इस समझौते का समर्थन करना चाहिए, जिसकी पुष्टि मॉस्को ने अभी तक नहीं की है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, फ़िनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और NATO महासचिव मार्क रुटे से बातचीत के बाद ज़ेलेंस्की ने X पर लिखा, "यूक्रेन युद्धविराम का समर्थन करता है और यह ज़रूरी है कि रूस भी इसका समर्थन करे। हम अमेरिकी पक्ष से जानकारी का इंतज़ार कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "हमारी तरफ़ से, यूक्रेन हमेशा तनाव कम करने, लोगों की जान बचाने और युद्ध खत्म करने व स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी फ़ैसलों का पूरा समर्थन करता है।"
ट्रंप ने लगभग 80 मिनट पहले 'ट्रुथ सोशल' पर इस युद्धविराम की घोषणा की थी।
उन्होंने लिखा, "अभी से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में 'एनर्जी सीज़फायर' लागू हो गया है। दोनों पक्ष सहमत हो गए हैं। इसे तोड़ें नहीं! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।"
लगभग 20 मिनट बाद व्हाइट हाउस ने भी X पर इस घोषणा को दोहराया। उन्होंने पोस्ट किया, "अभी से लागू: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में एनर्जी सीज़फायर।"
ट्रंप ने यह नहीं बताया कि युद्धविराम पर कब सहमति बनी, इसमें कौन-कौन सी सुविधाएँ शामिल हैं, यह कब तक चलेगा या इसकी निगरानी कैसे की जाएगी।
रविवार दोपहर तक क्रेमलिन ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते की पुष्टि नहीं की थी।
ज़ेलेंस्की ने शुरू में कहा था कि उन्हें इस बारे में नहीं बताया गया था। ट्रंप की पोस्ट के कुछ ही देर बाद उन्होंने 'एक्सियोस' (Axios) से कहा, "युद्धविराम की घोषणा मेरे लिए एक नई बात थी। लेकिन अगर रूसी 'एनर्जी सीज़फायर' के लिए सहमत होते हैं, तो यूक्रेन भी सहमत होगा।"
यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'कीव इंडिपेंडेंट' को बताया कि कीव के पास युद्धविराम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन्हें संदेह है कि रूस को भी इसकी जानकारी दी गई होगी।
इससे पहले रविवार को ज़ेलेंस्की ने बदले में हमले रोकने का प्रस्ताव दिया था। 'एसोसिएटेड प्रेस' के अनुसार, उन्होंने कहा, "अगर रूस हमारे ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर हमले बंद कर देता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए तैयार होगा।"
यह घोषणा ट्रंप द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अमेरिकी और वैश्विक बाज़ारों में रूसी डीज़ल की आपूर्ति करने के समझौते की जानकारी देने के दो दिन बाद आई है। इस कदम की यूक्रेन, यूरोपीय अधिकारियों और दोनों अमेरिकी पार्टियों के सांसदों ने आलोचना की थी। शनिवार को ट्रंप ने रूसी रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के लिए ज़ेलेंस्की को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि यूक्रेन को "एक नया नेता चुनना चाहिए जो समझौता कर सके"।
यह ऐसी पहली घोषणा नहीं है। पिछले महीने, ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा था कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के एनर्जी ठिकानों पर हमला न करने पर सहमत हो गए हैं। 'एक्सियोस' की रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय किसी भी पक्ष ने समझौते की पुष्टि नहीं की थी और दोनों ने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रखे थे।
इस मामले के नतीजों में भारत की सीधी दिलचस्पी है। 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने 7 अक्टूबर को इस प्रस्ताव की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि नई दिल्ली ने तीन हिस्सों वाला एक युद्धविराम प्रस्ताव रखा है। इसमें एनर्जी सुविधाओं और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने, ब्लैक सी (काला सागर) के बंदरगाहों से अनाज और एनर्जी की सप्लाई जारी रखने और कमर्शियल शिपिंग पर हमले बंद करने की बात कही गई है।
अखबार ने बताया कि भारत को होने वाली रूसी एनर्जी सप्लाई का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा ब्लैक सी के बंदरगाहों से आता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 अक्टूबर को कहा, "भारत मदद करने की कोशिश कर रहा है। इसकी शुरुआत ब्लैक सी में शिपिंग की सुरक्षा के मुद्दे से हो रही है, साथ ही रूस और यूक्रेन की अनाज और एनर्जी एक्सपोर्ट तथा हमले न होने की संभावनाओं से जुड़ी तत्काल चिंताओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।"
ट्रंप की घोषणा पर नई दिल्ली की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।
डीज़ल डील ने अमेरिका में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के प्रति वॉशिंगटन के रुख पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह डील उस कानून पर ट्रंप के हस्ताक्षर करने के एक महीने से भी कम समय बाद हुई है, जिसमें भारत समेत रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
फरवरी 2022 में मॉस्को द्वारा बड़े पैमाने पर हमले (इनवेज़न) के बाद से रूस और यूक्रेन ने बार-बार एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए हैं।
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