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kaahira काहिरा। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती ने बुधवार को क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की। अब्देलती ने जॉर्डन, बहरीन और ईरान के अपने समकक्षों के साथ फोन पर बातचीत की। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती ने जॉर्डन, बहरीन और ईरान के अपने समकक्षों से फोन पर बात की और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की। यह अपील अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद की गई।
मिस्र के विदेश मंत्रालय के अनुसार, फोन वार्ता के दौरान अब्देलती ने कहा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ाया जाए, ताकि तनाव को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि संघर्ष के विस्तार को रोकने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना जरूरी है। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई बढ़ने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
अब्देलती और ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने क्षेत्र की मौजूदा गंभीर स्थिति पर चर्चा की और कहा कि संघर्ष को पड़ोसी देशों तक फैलने से रोकना बेहद जरूरी है। अब्देलती ने अच्छे पड़ोसी संबंधों और देशों की संप्रभुता के सम्मान की भी बात दोहराई। उन्होंने जोर देकर कहा कि तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता कूटनीति है। 5 मार्च को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी ने अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों से पैदा हुए मध्य पूर्व संकट पर बात की। मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि मिस्र युद्ध रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
मिस्र की सैन्य अकादमी में आयोजित एक समारोह में सिसी ने कहा कि यह युद्ध गलत आकलन और गलत फैसलों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में मिस्र ने कई कठिन परिस्थितियों, चुनौतियों और उकसावों का सामना किया है, लेकिन देश ने आरोपों और साजिशों के बावजूद बहुत धैर्य रखा है। सिसी ने कहा कि यह धैर्य प्रभावी साबित हुआ है और कुछ देशों के साथ मिस्र के संबंधों में भी इसका इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा संकट से कीमतों पर असर पड़ सकता है और लोगों से अपील की कि कोई भी इस स्थिति का फायदा उठाकर कीमतें न बढ़ाए या उनमें हेरफेर न करे। उन्होंने यह भी कहा कि मिस्र लगभग आपातकाल जैसी स्थिति में है और लोगों की जरूरी जरूरतों से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
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