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Earthquake Myanmar: म्यांमार में भूकंप से मरने वालों की संख्या हुई इतनी

Uma Verma
29 March 2025 1:49 PM IST
Earthquake Myanmar: म्यांमार में भूकंप से मरने वालों की संख्या हुई इतनी
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म्यांमार | Earthquake Myanmar: म्यांमार में बीते दिनों आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, जिससे अब तक 1002 लोगों की मौत हो चुकी है और 2376 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह भूकंप म्यांमार के पश्चिमी और मध्य हिस्से में आया, जिसने न केवल इंसानी जीवन को प्रभावित किया, बल्कि पूरी संरचनात्मक व्यवस्था को भी बर्बाद कर दिया। भूकंप के बाद के हालात बेहद गंभीर हैं, और राहत कार्यों में जुटे संगठन मानवीय संकट को कम करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

Earthquake Myanmar: भारत ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए म्यांमार में राहत कार्यों के लिए "ऑपरेशन ब्रह्मा" शुरू किया है। इस ऑपरेशन के तहत, भारतीय वायुसेना ने 15 टन राहत सामग्री और मेडिकल सपोर्ट के साथ यंगून के लिए विमान भेजे हैं। राहत सामग्री में प्राथमिक चिकित्सा किट, खाद्य पैकेट, पानी की बोतलें और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इसके साथ ही, NDRF की 8वीं बटालियन को भी राहत कार्यों में सहायता के लिए भेजा गया है, ताकि मलबे में दबे हुए लोगों को जल्दी से जल्दी सुरक्षित निकाला जा सके।

म्यांमार सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है, और कई देशों ने अपने राहत प्रयासों के तहत म्यांमार को सहायता भेजनी शुरू कर दी है। लेकिन भूकंप के बाद म्यांमार में हालात गंभीर बने हुए हैं, और मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अब तक हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं और कई इलाकों में संचार व्यवस्था पूरी तरह से टूट गई है।

भारत के इस ऑपरेशन ब्रह्मा को लेकर अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन एक संयुक्त प्रयास का हिस्सा है, जिसमें भारतीय सरकार के अलावा, भारतीय नागरिक संगठन भी राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। इसके अलावा, भारत ने म्यांमार में कई सशस्त्र बलों और मेडिकल टीमों को भेजने का भी प्रस्ताव दिया है, ताकि स्थानीय अधिकारियों की मदद की जा सके। भारतीय सैन्य अधिकारियों के अनुसार, राहत सामग्री के अलावा, बचाव दल मलबे में दबे लोगों की पहचान करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

इसके साथ ही, भारत ने अपनी सभी सीमाओं को खोलने की भी घोषणा की है ताकि प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति की जा सके। भारत का यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहानुभूति का प्रतीक है, बल्कि म्यांमार के लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद का स्रोत भी है।

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