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होर्मुज में ड्रोन हमला दो ईरानी मछुआरे घायल, अमेरिका पर आरोप

Ratna Netam
31 Oct 2026 6:46 PM IST
होर्मुज में ड्रोन हमला दो ईरानी मछुआरे घायल, अमेरिका पर आरोप
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तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और गंभीर घटना सामने आई है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में केशम द्वीप के पास मछली पकड़ने वाली दो नावों को निशाना बनाया। इस कथित ड्रोन हमले में दो ईरानी मछुआरे घायल हो गए। घटना के बाद दोनों नावों पर सवार दो मछुआरों के लापता होने की खबर आई थी, लेकिन बाद में उन्हें सुरक्षित खोज लिया गया। उन्हें वापस केशम द्वीप भेज दिया गया है। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, केशम फिशिंग कम्युनिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने बताया कि ड्रोन हमले के बाद लापता हुए दोनों मछुआरे मिल गए हैं। उन्हें सुरक्षित रूप से द्वीप वापस भेज दिया गया। वहीं, अल जजीरा ने फार्स समाचार एजेंसी के हवाले से बताया कि घायल मछुआरों में से एक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के संबंध में ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर हमला करने का आरोप लगाया है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस कथित हमले की तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
सुबह करीब 11:30 बजे हुआ हमला
होर्मोजगन प्रांत के राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक मामलों के डिप्टी गवर्नर अहमद नफीसी ने तस्नीम समाचार एजेंसी को बताया कि यह घटना शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे हुई। उनके मुताबिक, केशम काउंटी के मुसान गांव के पास मछली पकड़ने वाली दो नावें मौजूद थीं। इन दोनों नावों पर दो-दो लोग सवार थे।अधिकारी के अनुसार, हमले के बाद नावों पर सवार लोग प्रभावित हुए और दो मछुआरे लापता हो गए थे। इसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई। शुरुआती रिपोर्टों में दो लोगों के लापता होने और एक मछुआरे के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में केशम फिशिंग कम्युनिटी के CEO ने दोनों लापता मछुआरों के मिल जाने की पुष्टि की।फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, घायलों में से एक को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, दूसरे घायल व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिका पर ईरानी मछुआरों को निशाना बनाने का आरोप
ईरानी अधिकारियों ने इस घटना के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि मछली पकड़ने वाली नावों को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। हालांकि, अभी तक इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के हवाले से इस घटना की जानकारी दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि होर्मोजगन प्रांत के एक अधिकारी ने अमेरिका पर दो मछली पकड़ने वाली नावों पर हमला करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम के बीच दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरानी नौसेना ने दुश्मन के ड्रोन पोत को नष्ट करने का किया दावा
मछुआरों की नावों पर कथित हमले से एक दिन पहले शुक्रवार को भी होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियों की खबर सामने आई थी। ईरान की नौसेना ने दावा किया था कि उसने जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में एक दुश्मन मानवरहित समुद्री पोत (Unmanned Surface Vessel-USV) को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया।ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, नौसेना ने बताया कि यह पोत शुक्रवार सुबह उसके निगरानी क्षेत्र में सक्रिय था। ईरानी बलों ने कार्रवाई करते हुए उसे नष्ट कर दिया। हालांकि, ईरान ने इस पोत के वास्तविक संचालक या उसकी गतिविधियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की।कुछ रिपोर्टों में इसे दुश्मन की पनडुब्बी बताया गया है, जबकि तस्नीम की विस्तृत रिपोर्ट में इसे मानवरहित समुद्री पोत कहा गया है। इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही घटना मानना सही नहीं होगा।
दो तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचने का दावा
ईरानी नौसेना ने शुक्रवार को दो वाणिज्यिक तेल टैंकरों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में प्रतिबंधित और असुरक्षित समुद्री क्षेत्र से गुजर रहे थे। आरोप है कि इन जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर रखे थे और सुरक्षा संबंधी चेतावनियों की अनदेखी की थी।ईरानी नौसेना का दावा है कि समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों से टकराने के कारण दोनों टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें आग लग गई। ईरानी अधिकारियों ने जहाजों के संचालकों को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है।इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नौसेना ने भी दो तेल टैंकरों को रोकने की जानकारी दी थी। उसका आरोप था कि जहाजों ने निर्धारित समुद्री मार्गों और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया था। हालांकि, इन घटनाओं से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है।दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। इसके अलावा प्राकृतिक गैस के वैश्विक व्यापार में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यहां सैन्य टकराव, जहाजों पर हमले या समुद्री यातायात में बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की आपूर्ति, माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है। इसका असर भारत जैसे उन देशों पर भी पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ ईरान अपनी समुद्री सीमाओं और सैन्य निगरानी वाले क्षेत्रों में किसी भी कथित घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री आवाजाही तथा सुरक्षा को लेकर मतभेद बने हुए हैं।मछुआरों की नावों पर कथित हमले की घटना इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि इसमें सैन्य जहाजों के बजाय आम नागरिकों की आजीविका से जुड़ी नावें प्रभावित हुई हैं। मछुआरों का समुद्र में जाना उनके रोजमर्रा के रोजगार का हिस्सा है। ऐसे में सैन्य गतिविधियों के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।फिलहाल दो लापता मछुआरों के मिल जाने से राहत जरूर मिली है, लेकिन घायलों के उपचार और घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है। अमेरिका की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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