विश्व
पाकिस्तान में पेयजल संकट फिल्ट्रेशन प्लांट से निकल रहा गंदा पानी
Ratna Netam
8 Oct 2026 8:24 PM IST

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रावलपिंडी। पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए गए फिल्ट्रेशन प्लांटों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों ने शिकायत की है कि जिन संयंत्रों से साफ और सुरक्षित पानी मिलने की उम्मीद थी, उनसे अब मिट्टी मिला हुआ गंदला पानी निकल रहा है। पुराने फिल्टर, रखरखाव के लिए धन की कमी और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण समस्या बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अब तक प्रभावी समाधान नहीं किया है। इससे पानी की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तानी समाचार पत्र 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की 8 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी के यूनियन काउंसिल-46, नया मोहल्ला, सादिकाबाद, धोके इलाही बख्श और धोके हसू सहित कई क्षेत्रों में लगाए गए जल शोधन संयंत्रों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन संयंत्रों से मिलने वाले पानी में मिट्टी साफ दिखाई देती है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।
निवासियों के अनुसार, फिल्ट्रेशन प्लांटों का निर्माण लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति में इनकी कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि संयंत्रों के रखरखाव की अनदेखी के कारण पानी की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। इससे सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर परिवारों के सामने कठिनाई पैदा हो गई है।प्रभावित फिल्ट्रेशन प्लांटों के संचालकों ने भी समस्या की पुष्टि करते हुए बताया कि रखरखाव के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबे समय से फिल्टर नहीं बदले गए हैं। पुराने फिल्टर की कार्यक्षमता प्रभावित होने से संयंत्र पानी को अपेक्षित स्तर तक साफ नहीं कर पा रहे हैं।
संचालकों का कहना है कि समस्या केवल फिल्टर बदलने तक सीमित नहीं है। संयंत्रों को पानी उपलब्ध कराने वाले ट्यूबवेलों में भूजल स्तर गिरने से भी परेशानी बढ़ी है। उनके अनुसार, भूमिगत जलस्तर कम होने के कारण कई ट्यूबवेलों से मिट्टी मिला पानी निकल रहा है। यही पानी फिल्ट्रेशन प्लांटों तक पहुंच रहा है, जिससे शोधन प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक, रावलपिंडी में नगर निगम, जल एवं स्वच्छता एजेंसी (WASA) और जिला परिषद की ओर से वर्ष 2000 से पहले स्थापित किए गए कई ट्यूबवेल भी गिरते भूजल स्तर से प्रभावित हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2001 से 2026 के बीच शहर के भूजल स्तर में 200 फीट से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके कारण पुराने ट्यूबवेलों की जलापूर्ति क्षमता और पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
भूजल स्तर में गिरावट जलापूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। जब भूमिगत जलस्रोतों में पानी का स्तर नीचे चला जाता है, तो पुराने ट्यूबवेलों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ स्थितियों में पानी के साथ मिट्टी या अन्य ठोस कण भी आने लगते हैं। ऐसे पानी को पीने योग्य बनाने के लिए पर्याप्त शोधन और नियमित गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक होता है।रावलपिंडी में स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों की ओर से जल शोधन संयंत्रों की नियमित निगरानी और आवश्यक रखरखाव नहीं किया जा रहा है। इससे उन परिवारों की परेशानी बढ़ रही है, जो दैनिक जरूरतों के लिए इन संयंत्रों से पानी प्राप्त करते हैं।
स्थानीय निवासी इफ्तिखारुद्दीन, फैयाज शाह, फरहान हामिद और फैयाज ने बताया कि उन्होंने फिल्ट्रेशन प्लांटों से मिलने वाले पानी की प्रयोगशाला में जांच कराई थी। उनका दावा है कि जांच में पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित पंजाब आब-ए-पाक प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन प्रयोगशाला जांचों के विस्तृत परिणाम स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पानी का गंदला दिखाई देना उसमें मौजूद सभी संभावित हानिकारक पदार्थों की पुष्टि नहीं करता। पानी में जीवाणु, रासायनिक तत्व और अन्य अशुद्धियों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी होता है। यदि पीने के पानी में हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हों, तो इससे दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इस बीच रावलपिंडी की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव भी सामने आया है। जल एवं स्वच्छता एजेंसी (WASA) ने शहर के 130 फिल्ट्रेशन प्लांटों का प्रशासनिक नियंत्रण पंजाब साफ पानी प्राधिकरण (PSPA) को सौंप दिया है। ये संयंत्र ट्यूबवेलों से जुड़े हुए हैं और अब इनके रखरखाव तथा संचालन की जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरण के पास होगी।इस बदलाव के साथ प्राधिकरण की प्रशासनिक व्यवस्था भी बदली गई है। पहले यह पंजाब के आवास मंत्रालय के अधीन कार्यरत था, जबकि अब इसे स्थानीय सरकार विभाग के अंतर्गत रखा गया है। प्रशासनिक बदलाव का उद्देश्य जल शोधन संयंत्रों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी को व्यवस्थित करना है।
रावलपिंडी WASA के प्रबंध निदेशक अजीजुल्लाह खान ने 130 फिल्ट्रेशन प्लांटों का नियंत्रण हस्तांतरित किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एजेंसी इस समय चहान बांध और दादोचा बांध से जुड़ी जलापूर्ति परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।अधिकारियों के अनुसार, चहान बांध जलापूर्ति परियोजना के वर्ष 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। इससे शहर को प्रतिदिन अतिरिक्त 1.7 करोड़ गैलन पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, दादोचा बांध परियोजना के वर्ष 2029 तक पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना से रावलपिंडी शहर और छावनी क्षेत्रों को प्रतिदिन अतिरिक्त 3.5 करोड़ गैलन पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके अतिरिक्त WASA ने कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) के साथ समझौते के बाद एक्सप्रेसवे के आसपास 15 नए ट्यूबवेल लगाने की दिशा में भी काम शुरू किया है। इन योजनाओं का उद्देश्य शहर की बढ़ती जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए आपूर्ति के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है।हालांकि, दीर्घकालिक जलापूर्ति परियोजनाओं के साथ वर्तमान फिल्ट्रेशन प्लांटों की समस्याओं का तत्काल समाधान भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग है कि खराब फिल्टर बदले जाएं, संयंत्रों की मरम्मत की जाए और पानी की नियमित प्रयोगशाला जांच सुनिश्चित की जाए।रावलपिंडी में जल संकट की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 की एक रिपोर्ट में शहर और छावनी क्षेत्रों के कई इलाकों में पानी की गंभीर कमी की जानकारी दी गई थी। उस समय पुराने ट्यूबवेलों के सूखने, मोटरों में खराबी और फिल्ट्रेशन प्लांट बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
फिलहाल रावलपिंडी के कई इलाकों में फिल्ट्रेशन प्लांटों से मिट्टी मिला पानी मिलने की शिकायतों ने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निवासियों का कहना है कि स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए संयंत्रों की नियमित देखरेख आवश्यक है।अब संबंधित प्रशासन के सामने खराब फिल्टर बदलने, गिरते भूजल स्तर से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की चुनौती है। जब तक प्रभावित संयंत्रों की जांच और आवश्यक सुधार नहीं किए जाते, तब तक स्थानीय लोगों की सुरक्षित पेयजल उपलब्धता को लेकर चिंता बनी रह सकती है।
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