विश्व
पाकिस्तान की नीतियों से PoJK में असंतोष, रावलकोट में हालात तनावपूर्ण
Ratna Netam
8 Nov 2026 3:07 PM IST

x
इस्लामाबाद/रावलकोट। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में सरकार और स्थानीय नागरिकों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों के सख्त रवैये के खिलाफ क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। खासतौर पर रावलकोट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद इलाके में फिर से खून-खराबे की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है और बड़ी संख्या में लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं।नवंबर की शुरुआत में रावलकोट में प्रदर्शन स्थलों को खाली कराने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया था। 5 नवंबर को हुई इस कार्रवाई के दौरान गोलीबारी और हिंसक झड़पों की खबरें सामने आईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में कई नागरिकों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया है।
रावलकोट में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बिगड़े हालात
रावलकोट में तनाव उस समय और बढ़ गया, जब सुरक्षा बलों ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े धरना स्थलों को हटाने की कोशिश की। यह संगठन कई महीनों से स्थानीय नागरिकों की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने धरना स्थलों पर कार्रवाई के दौरान गोलीबारी की और ड्रोन का इस्तेमाल किया।रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पाकिस्तान रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल थे। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हुआ। कुछ रिपोर्टों में सात लोगों की मौत और करीब 23 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में हताहतों की संख्या को लेकर अंतर है और ड्रोन हमलों से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।पुलिस और प्रशासन की ओर से अलग पक्ष भी सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, धरना स्थलों से अवरोध हटाने और रास्ते खोलने की कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से सुरक्षा कर्मियों पर गोलीबारी की गई। ऐसे में हिंसा की परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
महंगाई, बिजली दरों और गेहूं सब्सिडी को लेकर आंदोलन
PoJK में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे केवल राजनीतिक असंतोष ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियां भी बड़ी वजह हैं। स्थानीय लोग बिजली की बढ़ती दरों, गेहूं पर मिलने वाली सब्सिडी में कटौती, भारी टैक्स और बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी है।ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी लंबे समय से इन मुद्दों को उठाती रही है। संगठन की ओर से स्थानीय लोगों के अधिकारों, प्रशासनिक सुधारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी मांगें रखी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का सहारा ले रही है।जून 2026 से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल गया। रावलकोट के अलावा मुजफ्फराबाद सहित कई इलाकों में भी विरोध-प्रदर्शन हुए। स्थानीय लोगों ने दुकानों और बाजारों को बंद रखकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया।
ड्रोन और भारी हथियारों के इस्तेमाल के आरोप
रावलकोट में हालिया कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर ड्रोन और भारी हथियारों के इस्तेमाल के आरोप भी लगे हैं। प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि धरना स्थलों के आसपास सुरक्षा बलों ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में रिहायशी इलाकों के आसपास विस्फोट और ड्रोन हमलों की भी जानकारी दी गई है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कुछ रिपोर्टों में तीन से सात नागरिकों की मौत की जानकारी दी गई, जबकि घायलों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच संचार व्यवस्था और मीडिया की पहुंच पर पाबंदियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था सख्त होने के कारण स्थानीय कारोबार, परिवहन और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता, बातचीत की अपील
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी रावलकोट में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है। आयोग ने संघीय और PoJK सरकार से अपील की है कि नागरिकों की शिकायतों का समाधान बल प्रयोग के बजाय सार्थक बातचीत के माध्यम से किया जाए।आयोग ने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों दोनों के हताहत होने की खबरों पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वतंत्र रूप से मीडिया की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है। उसका कहना है कि क्षेत्र में हालात और बिगड़ने से रोकना तथा नागरिकों की जान की सुरक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए।मानवाधिकार आयोग की यह अपील ऐसे समय आई है, जब रावलकोट में लगातार तनाव बना हुआ है और आंदोलनकारी अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
राजनीतिक समाधान नहीं निकलने से बढ़ रही चिंता
PoJK में मौजूदा संकट ने पाकिस्तान सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आंदोलनकारी संगठन का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।क्षेत्र में पहले से जारी असंतोष के बीच ताजा हिंसा ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि गिरफ्तार लोगों के मामलों पर पुनर्विचार किया जाए, नागरिक अधिकारों का सम्मान हो और उनकी मांगों पर सरकार बातचीत करे।
रावलकोट पर टिकी निगाहें
फिलहाल रावलकोट PoJK में जारी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां सुरक्षा बलों की तैनाती और विरोध-प्रदर्शनों के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। स्थानीय नागरिकों को आशंका है कि यदि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच बातचीत का रास्ता नहीं निकला तो हिंसा दोबारा भड़क सकती है।कुल मिलाकर, PoJK में मौजूदा संकट केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसमें आर्थिक परेशानियां, राजनीतिक अधिकार और मानवाधिकार जैसे कई मुद्दे शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार का रुख और आंदोलनकारी संगठनों के साथ बातचीत की संभावना तय करेगी कि क्षेत्र में तनाव कम होगा या हालात और गंभीर होंगे।
Next Story





