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Athens एथेंस। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास के साथ अहम बातचीत की। ग्रीस के रक्षा मंत्री उसी दिन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निमंत्रण पर आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “ग्रीस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोस डेंडियास का स्वागत करते हुए खुशी हुई। रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। उनके विचारों और आकलन की सराहना करता हूं।”
इससे पहले दिन में निकोस डेंडियास ने कहा था कि वह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निमंत्रण पर भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हैं। उन्होंने बताया कि वह भारतीय रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात को लेकर उत्सुक हैं।
डेंडियास ने यह भी कहा कि वह भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) फोरम में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और सुरक्षा मुद्दों पर होने वाली चर्चा में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा, वह बेंगलुरु में भी संपर्क करेंगे, जहां ग्रीक रक्षा उद्योग इकोसिस्टम और भारत के रक्षा उद्योग के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
इस सप्ताह की शुरुआत में ग्रीस के रक्षा मंत्री ने अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन का दौरा किया था, जहां उन्होंने अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और रक्षा नीति के लिए जिम्मेदार अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी से मुलाकात की।
वॉशिंगटन यात्रा के समापन पर डेंडियास ने हेगसेथ के साथ हुई बैठक को लेकर कहा कि इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र से जुड़े कई व्यापक मुद्दों, रणनीतिक चुनौतियों और ग्रीक सशस्त्र बलों में सुधार के प्रयासों- ‘एजेंडा 2030’ पर ग्रीस का पक्ष रखा। उन्होंने अमेरिका के साथ किए गए कई रक्षा समझौतों का भी जिक्र किया, जिनमें एफ-35 लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ा करार शामिल है, और बताया कि इन समझौतों को ग्रीक सशस्त्र बलों के हित में कैसे लागू किया जाएगा।
पिछले महीने अमेरिका में एक द्विदलीय विधेयक ने कांग्रेस में एक अहम बाधा पार की थी, जो पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र को अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में रखता है और जिसमें भारत से जुड़ी कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
‘ईस्टर्न मेडिटेरेनियन गेटवे एक्ट’ को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने 45–2 मतों से पारित किया। इसके समर्थकों का कहना है कि यह विधेयक भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक कॉरिडोर के तहत पूर्वी भूमध्यसागर को भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच एक रणनीतिक कड़ी के रूप में मजबूत करता है।
आईएमईसी की घोषणा 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और अन्य साझेदार देशों के समर्थन से की गई थी। इस कॉरिडोर का उद्देश्य मध्य पूर्व के जरिए रेल, बंदरगाह, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से भारत को यूरोप से जोड़ना है, जिसमें पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप के लिए एक अहम प्रवेश द्वार की भूमिका निभाएगा।
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