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भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक हलचल तेज, 4 नवंबर को काठमांडू पहुंचेंगे विक्रम मिसरी

Ratna Netam
2 Nov 2026 6:20 PM IST
भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक हलचल तेज, 4 नवंबर को काठमांडू पहुंचेंगे विक्रम मिसरी
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नई दिल्ली। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी 4 और 5 नवंबर 2026 को नेपाल की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। इस प्रस्तावित दौरे को भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा परियोजनाओं और संपर्क सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के नागरिकों के बीच आवाजाही, व्यापार, शिक्षा, रोजगार और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग बना हुआ है। ऐसे में विदेश सचिव स्तर की यात्रा को दोनों पड़ोसी देशों के बीच नियमित राजनयिक संपर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है।विक्रम मिसरी की यात्रा ऐसे समय प्रस्तावित है, जब दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा व्यापार और आर्थिक साझेदारी को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रयास जारी हैं। नेपाल के साथ भारत का सहयोग इन क्षेत्रों में विशेष महत्व रखता है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने जारी की आधिकारिक जानकारी
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 2 नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में विक्रम मिसरी की यात्रा की पुष्टि की है। मंत्रालय के अनुसार, नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के आमंत्रण पर भारतीय विदेश सचिव काठमांडू पहुंचेंगे।दोनों देशों के विदेश सचिव द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान भारत-नेपाल संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की जाएगी और साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान होगा।आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, विक्रम मिसरी नेपाल के उच्चस्तरीय गणमान्य व्यक्तियों से शिष्टाचार मुलाकात भी करेंगे। वे 5 नवंबर को काठमांडू से नई दिल्ली लौटेंगे।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की भारत यात्रा की तैयारियां
विक्रम मिसरी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से भी जाना जाता है, की प्रस्तावित भारत यात्रा है।नेपाल के प्रधानमंत्री नवंबर के अंतिम सप्ताह में नई दिल्ली आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनकी यात्रा 22 नवंबर के आसपास होने की संभावना है। हालांकि, दोनों सरकारों ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।मार्च 2026 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह बालेन शाह की पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया है।विक्रम मिसरी के दौरे के दौरान प्रस्तावित यात्रा के एजेंडे, संभावित समझौतों और उच्चस्तरीय बैठकों की तैयारियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
ऊर्जा और जलविद्युत परियोजनाओं पर रहेगा ध्यान
भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। नेपाल में जलविद्युत उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं, जबकि भारत बिजली का एक बड़ा बाजार है।दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार और जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश को लेकर कई समझौते हुए हैं। इन परियोजनाओं के जरिए नेपाल को बिजली निर्यात से राजस्व प्राप्त करने और भारत को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल की ओर से नई जलविद्युत परियोजनाओं में भारतीय निवेश बढ़ाने की मांग उठाई जा सकती है।लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना सहित अन्य विकास कार्यों को लेकर भी उच्चस्तरीय बातचीत की संभावना जताई गई है। हालांकि, किसी नई परियोजना या निवेश की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
सड़क, रेल और सीमा संपर्क बढ़ाने पर चर्चा संभव
भारत और नेपाल के बीच सड़क, रेल तथा सीमा पार व्यापार सुविधाओं का विस्तार दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है।रिपोर्टों के अनुसार, भैरहवा में एकीकृत जांच चौकी, दार्चुला में पुल और महाकाली नदी पर मोटर योग्य पुल जैसी परियोजनाएं आगामी उच्चस्तरीय वार्ता के एजेंडे में शामिल हो सकती हैं।इसके अतिरिक्त दोधारा चांदनी में एकीकृत जांच चौकी और भारत के सिलीगुड़ी से नेपाल के झापा तक पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना पर भी चर्चा की संभावना है।इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमा पार व्यापार को सुगम बनाना, परिवहन लागत कम करना और दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
जनकपुर-अयोध्या रेल संपर्क की भी चर्चा
नेपाल के जनकपुरधाम और भारत के अयोध्याधाम के बीच प्रस्तावित रेल सेवा को लेकर भी तैयारियों की खबरें सामने आई हैं।दोनों शहरों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। जनकपुर माता सीता की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है, जबकि अयोध्या भगवान राम से जुड़ा प्रमुख धार्मिक केंद्र है।यदि दोनों शहरों के बीच यात्री रेल संपर्क शुरू होता है, तो इससे धार्मिक पर्यटन और यात्रियों की आवाजाही को बढ़ावा मिल सकता है।हालांकि, इस सेवा के शुभारंभ की आधिकारिक तारीख और परिचालन व्यवस्था की पुष्टि अभी बाकी है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में सहायता का मुद्दा
नेपाल में हाल ही में भोटेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण प्रभावित बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण का मुद्दा भी भारत के साथ चर्चा में उठ सकता है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल सरकार भारत से आर्थिक सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग की अपेक्षा कर रही है।भारत इससे पहले भी नेपाल में भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बाद राहत तथा पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग करता रहा है।इस बार सहायता की संभावित राशि या परियोजनाओं को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नए भारतीय राजदूत भी संभालेंगे जिम्मेदारी
विदेश सचिव की यात्रा से पहले नेपाल में भारत के नवनियुक्त राजदूत सुधाकर दलेला के 3 नवंबर को काठमांडू पहुंचने का कार्यक्रम है।दलेला भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं और इससे पहले भूटान में भारत के राजदूत रह चुके हैं।वे नवीन श्रीवास्तव का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है।नए राजदूत की नियुक्ति और विदेश सचिव की यात्रा को दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीमा विवाद और आपसी चिंताओं पर भी नजर
भारत और नेपाल के संबंधों में सहयोग के साथ कुछ संवेदनशील मुद्दे भी मौजूद हैं। लिपुलेख क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।मई 2026 में विक्रम मिसरी की प्रस्तावित नेपाल यात्रा स्थगित हो गई थी। उस समय मीडिया रिपोर्टों में प्रोटोकॉल संबंधी मुद्दों और लिपुलेख विवाद को संभावित कारणों के रूप में बताया गया था।हालांकि, इस बार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में किसी विशेष विवाद को वार्ता के एजेंडे के रूप में नहीं बताया गया है।
दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी नई दिशा
विक्रम मिसरी की 4 और 5 नवंबर की यात्रा से भारत और नेपाल के बीच लंबित परियोजनाओं, आर्थिक सहयोग और आगामी उच्चस्तरीय वार्ता की तैयारियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।नेपाल के प्रधानमंत्री की संभावित भारत यात्रा को देखते हुए विदेश सचिव स्तर की बातचीत विशेष महत्व रखती है। अब दोनों देशों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि काठमांडू में होने वाली बैठकों से किन मुद्दों पर सहमति बनती है और भविष्य के सहयोग के लिए क्या रूपरेखा सामने आती है।
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