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वाशिंगटन-तेहरान के बीच संभावित शांति समझौता, 14 सूत्रों वाले ड्राफ्ट पर चर्चा
अमेरिका के सीनियर अधिकारियों ने पत्रकारों के सामने ईरान के साथ हुए समझौते (MOU) को पढ़ा। इस दस्तावेज़ में क्या है, इसे लेकर कई दिनों से गोपनीयता बरती जा रही थी।
अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर उस ड्राफ़्ट को पढ़ा, जिसे ईरान ने अभी तक जारी नहीं किया है। यह ड्राफ़्ट शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले पढ़ा गया।
Le Président Trump a signé ce soir à Versailles l’accord entre l’Iran et les États-Unis. Cet accord ouvre la voie à une paix durable et permet la réouverture du détroit d’Ormuz. C’est un pas important dans la bonne direction pour nos compatriotes… pic.twitter.com/b1XgZrBv0m
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) June 18, 2026
अमेरिकी ड्राफ़्ट में ये बातें शामिल हैं:
1. अमेरिका और ईरान (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान) और मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी इस MOU पर हस्ताक्षर करके लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की घोषणा करते हैं। वे यह भी वचन देते हैं कि अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे, एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी देने से बचेंगे और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करेंगे। अंतिम समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थायी समाप्ति और इस पैराग्राफ की अन्य शर्तों की पुष्टि करेगा।
🚨 President Donald J. Trump has SIGNED the Iran Memorandum of Understanding at Versailles in France. 🇺🇸 pic.twitter.com/JQ6qlbvFAF
— The White House (@WhiteHouse) June 17, 2026
2. अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने का वचन देते हैं।
3. अमेरिका और ईरान बातचीत करने और अधिकतम 60 दिनों (आपसी सहमति से बढ़ाई जा सकने वाली अवधि) के भीतर अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
4. इस MOU पर हस्ताक्षर होते ही, अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और किसी भी तरह की रुकावट या बाधा को हटाना शुरू कर देगा और 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म कर देगा। इस दौरान, जहाजों की आवाजाही ईरान द्वारा बहाल किए जा रहे युद्ध-पूर्व यातायात की संख्या के अनुपात में होगी। अमेरिका यह भी वचन देता है कि अंतिम समझौते के बाद 30 दिनों के भीतर वह ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटा लेगा।
5. इस MOU पर हस्ताक्षर होने के बाद, ईरान अपनी पूरी कोशिश से फारस की खाड़ी से ओमान सागर और इसके विपरीत दिशा में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए व्यवस्था करेगा, जिसके लिए 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। कमर्शियल जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू हो जाएगी और ईरान द्वारा तकनीकी और सैन्य बाधाओं को दूर करने और बारूदी सुरंगों को हटाने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इसे 30 दिनों के भीतर पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान, ओमान सल्तनत के साथ बातचीत करके होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को तय करेगा। यह बातचीत फ़ारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ, लागू अंतरराष्ट्रीय कानूनों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के अनुसार की जाएगी।
6. संयुक्त राज्य अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर की एक निश्चित और आपसी सहमति वाली योजना विकसित करने का वादा करता है। इस योजना को लागू करने का तरीका अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में 60 दिनों के भीतर तय किया जाएगा। संबंधित वित्तीय लेन-देन के लिए ज़रूरी सभी लाइसेंस, छूट और अनुमतियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दी जाएँगी।
7. संयुक्त राज्य अमेरिका अंतिम समझौते के तहत एक तय समय-सीमा में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के ख़िलाफ़ सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाने का वादा करता है। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, IAEA बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी एकतरफा प्रतिबंध (प्राथमिक और माध्यमिक) शामिल हैं। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका ऊपर बताए गए प्रतिबंध हटाने के मुद्दे के महत्व को स्वीकार करते हैं और इन पर आपसी सहमति बनाने के लिए बातचीत में तुरंत इन मुद्दों पर चर्चा करने का इरादा रखते हैं।
8. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान फिर से पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही विकसित करेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान जमा किए गए संवर्धित (enriched) पदार्थ के निपटान के लिए एक ऐसे तरीके पर सहमत हुए हैं जिस पर आपसी सहमति होगी। यह तरीका पैराग्राफ 7 में बताए गए समय-सीमा के अनुसार होगा और इसमें IAEA की देखरेख में साइट पर ही 'डाउनब्लेंडिंग' (संवर्धन स्तर को कम करना) की न्यूनतम प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दोनों पक्ष संवर्धन के मुद्दे और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की परमाणु ज़रूरतों से जुड़े अन्य आपसी सहमति वाले मामलों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं, जो अंतिम समझौते में तय किए गए संतोषजनक ढांचे पर आधारित होंगे। अंतिम समझौता इस पैराग्राफ के प्रावधानों की पुष्टि करेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ऊपर बताए गए परमाणु मुद्दों के महत्व को स्वीकार करते हैं और इन पर आपसी सहमति बनाने के लिए बातचीत में तुरंत इन मुद्दों पर चर्चा करने का इरादा रखते हैं।
9. अंतिम समझौते तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान यथास्थिति बनाए रखने पर सहमत हैं। इस्लामिक रिपब्लिक अपने परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति को बनाए रखेगा और संयुक्त राज्य अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सेना तैनात करेगा।
10. संयुक्त राज्य अमेरिका यह वचन देता है कि इस MOU पर हस्ताक्षर होते ही और प्रतिबंध खत्म होने तक, U.S. ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और डेरिवेटिव्स के निर्यात और बैंकिंग लेनदेन, बीमा, परिवहन आदि सहित सभी संबंधित सेवाओं के लिए छूट (वेवर) जारी करेगा।
11. संयुक्त राज्य अमेरिका यह वचन देता है कि इस MOU के लागू होने पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के फ्रीज़ किए गए या प्रतिबंधित फंड और संपत्ति को पूरी तरह से इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराएगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान बातचीत के दौरान इन फंड्स को जारी करने से जुड़ी प्रक्रियाओं पर आपसी सहमति बनाएंगे। ऐसे फंड्स, चाहे वे मूल खाते में रखे जाएं या ट्रांसफर किए जाएं, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के सेंट्रल बैंक द्वारा बताए गए किसी भी अंतिम लाभार्थी को भुगतान के लिए पूरी तरह से इस्तेमाल करने योग्य बनाए जाएंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका इसके अनुसार सभी ज़रूरी लाइसेंस और मंज़ूरी जारी करने का वचन देता है।
12. संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इस बात पर सहमत हैं कि इस MOU के सफल कार्यान्वयन और अंतिम समझौते के भविष्य के अनुपालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
13. इस MOU पर हस्ताक्षर करने और इस MOU के पैराग्राफ 1, 4, 5, 10 और 11 के कार्यान्वयन की शुरुआत और इन उपायों के निरंतर कार्यान्वयन के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान विशेष रूप से अन्य पैराग्राफ पर अंतिम समझौते के संबंध में बातचीत शुरू करेंगे।
14. अंतिम समझौते को बाध्यकारी UNSC प्रस्ताव द्वारा मंज़ूरी दी जाएगी।
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