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India-US व्यापार वार्ता में प्रगति के बावजूद अंतिम समझौते पर मतभेद कायम

Kavita2
25 Jun 2026 9:44 AM IST
India-US व्यापार वार्ता में प्रगति के बावजूद अंतिम समझौते पर मतभेद कायम
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Washington DC वाशिंगटन डीसी : नई दिल्ली में 23-24 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई दो दिवसीय बैठक के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बावजूद दोनों देशों के बीच अंतिम व्यापार समझौते तक पहुंचने में अभी भी कई अहम मतभेद बने हुए हैं।

इस वार्ता को लेकर एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट वेंडी कटलर ने कहा कि हाल की बैठकों में सकारात्मक प्रगति जरूर हुई है, लेकिन भारत के साथ एक व्यापक व्यापार समझौता करना अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उनके अनुसार दोनों देशों की प्राथमिकताएं और ‘रेडलाइन’ यानी महत्वपूर्ण शर्तें अलग-अलग हैं, जो किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।

कटलर ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान विकसित हुए हालात के कारण दिल्ली के भीतर अमेरिका के प्रति भरोसे की कमी भी देखने को मिल रही है, जिससे बातचीत को अंतिम रूप देना और कठिन हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भरोसे की कमी दोनों पक्षों के बीच समझौते की गति को प्रभावित कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले टैरिफ व्यवस्था पर अधिक स्पष्टता चाहता है। भारत की प्राथमिकता यह है कि उसे अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में टैरिफ में बेहतर और तरजीही स्थिति मिले, ताकि उसके निर्यात को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़त मिल सके।

वेंडी कटलर के अनुसार, भारत चाहता है कि टैरिफ दरों और किन उत्पादों को इस व्यवस्था से बाहर रखा जाएगा, इस पर स्पष्ट जानकारी दी जाए। जब तक इस मुद्दे पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक भारत समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप देने के पक्ष में नहीं है।

इसके अलावा भारत वाशिंगटन से यह भी आश्वासन चाहता है कि भविष्य में टैरिफ दरों में और बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मांग अमेरिकी नीति-निर्माताओं, विशेषकर ट्रंप टीम के लिए स्वीकार करना आसान नहीं होगा।

बैठकों में दोनों पक्षों ने व्यापार बाधाओं को कम करने, बाजार पहुंच बढ़ाने और आपसी व्यापार को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में टैरिफ, आयात प्रतिबंध और रणनीतिक उत्पादों की सूची जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बरकरार हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, लेकिन संरचनात्मक अंतर और नीतिगत असहमति के कारण व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) या पूर्ण व्यापार समझौते तक पहुंचना अभी समय ले सकता है।

भारत की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए वह किसी भी समझौते में अपने हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। वहीं अमेरिका अपनी घरेलू औद्योगिक नीति और रणनीतिक हितों के आधार पर निर्णय ले रहा है।

इस बीच दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रहने की उम्मीद है और आने वाले महीनों में तकनीकी स्तर पर और बैठकें हो सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक टैरिफ और विश्वास से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट सहमति नहीं बनती, तब तक अंतिम समझौता दूर बना रहेगा।

फिलहाल यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन जटिल मुद्दों के समाधान के बिना कोई बड़ा व्यापार समझौता जल्द संभव नहीं दिखता।

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