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पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग

Renuka Sahu
22 Dec 2021 4:35 AM GMT
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग
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फाइल फोटो 

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में महंगाई और बेरोजगारी (Inflation And Unemployment) के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. अवैध रूप से कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit Baltistan) में अभूतपूर्व महंगाई और बेरोजगारी दर में तेज वृद्धि को लेकर इलाके के कई जिलों में लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. सैकड़ों स्थानीय लोगों ने घिसर जिले की सड़कों पर प्रदर्शन किया. महंगाई और बेरोजगारी से परेशान लोगों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने चुनाव प्रचार के दौरान झूठे वादे किए और अब मूल निवासियों पर कई तरह की आर्थिक कार्रवाई शुरू कर दी है.

महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन
गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) इलाके में प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि सरकार ने कई मदों पर सब्सिडी हटा दी है. मुद्रास्फीति की दर काफी अधिक और बेरोजगारी ऐतिहासिक पर ऊंचाई पर है. व्यापक बेरोजगारी ने न केवल क्षेत्र के लोगों के सामाजिक-आर्थिक मानकों को प्रभावित किया है, बल्कि मूल निवासियों को कर्ज और अवसाद की ओर भी धकेल दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्र में बेरोजगारी की वजह से मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर काफी बुरा असर पड़ रहा है. खास तौर से स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट के बीच बेरोजगारी की दर काफी ज्यादा है.
घोर गरीबी से जूझ रहे गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग
प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप है कि सरकार पढ़े लिखे लोगों को भी पर्याप्त अवसर नहीं दिला पा रही है. केवल इलाके के लोगों को हाशिए पर जाने के लिए सरकार ने काम किया है. पाकिस्तान की सरकार ने कुछ साल पहले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (China-Pak Economic Corridor) का विरोध करने पर गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को नौकरी, शिक्षा और समृद्धि का वादा किया था. हालांकि, जो वादा किया गया था उसका थोड़ा सा भी हिस्सा पूरा नहीं किया गया. इस बीच गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग घोर गरीबी और बेबसी से जूझ रहे हैं.
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