विश्व

ऑस्ट्रेलियाई युवाओं में बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा, 2054 तक 40 फीसदी वृद्धि की आशंका

jantaserishta.com
5 Feb 2026 9:31 AM IST
ऑस्ट्रेलियाई युवाओं में बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा, 2054 तक 40 फीसदी वृद्धि की आशंका
x
कैनबरा: गुरुवार को जारी नए आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में 65 वर्ष से कम उम्र के डिमेंशिया पीड़ितों की संख्या आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाली है। अनुमान है कि साल 2054 तक यह संख्या लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।
डिमेंशिया ऑस्ट्रेलिया के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय ऑस्ट्रेलिया में करीब 4 लाख 46 हजार 500 लोग डिमेंशिया के साथ जीवन जी रहे हैं। साल 2025 में यह संख्या 4 लाख 33 हजार 300 थी, यानी कुछ ही समय में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 18 से 65 वर्ष की उम्र के करीब 29 हजार लोग कम उम्र में होने वाले डिमेंशिया से पीड़ित हैं। अनुमान है कि साल 2054 तक यह संख्या बढ़कर करीब 41 हजार हो जाएगी। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 1500 बच्चे ऐसे भी हैं जो बचपन में होने वाले डिमेंशिया से जूझ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में डिमेंशिया पहली बार ऑस्ट्रेलिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बना। कुल मौतों में से 9.4 प्रतिशत मौतें डिमेंशिया से जुड़ी थीं।
ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर ने दिसंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा कि डिमेंशिया से पीड़ित ऑस्ट्रेलियाई लोगों की संख्या 2065 तक दोगुनी से भी ज्यादा होकर दस लाख से अधिक हो जाएगी।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, डिमेंशिया ऑस्ट्रेलिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी तान्या बुकानन ने कहा कि देश को दिमागी स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। साथ ही हर उम्र के डिमेंशिया मरीजों के लिए बेहतर इलाज, देखभाल और सहायता सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि डिमेंशिया की देखभाल और शोध के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की पहचान दुनिया भर में है, लेकिन अभी भी व्यवस्था में कई सुधार किए जाने की जरूरत है।
संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि दिमागी स्वास्थ्य को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, देशभर में सहायता सेवाओं का मजबूत नेटवर्क बनाया जाए और डिमेंशिया मरीजों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए।
डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई बीमारियों के कारण होने वाली स्थिति है। इसमें धीरे-धीरे दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचता है और दिमाग सही तरह से काम करना कम कर देता है। इसका सबसे ज्यादा असर सोचने, समझने और याददाश्त पर पड़ता है। आमतौर पर व्यक्ति की चेतना बनी रहती है, लेकिन उसके स्वभाव, भावनाओं, व्यवहार और काम करने की इच्छा में बदलाव आ सकता है।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story