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PoJK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की मांग

Ratna Netam
1 Oct 2026 7:41 PM IST
PoJK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की मांग
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जिनेवा। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के केंद्रीय प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने 5 जून 2026 के बाद जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े प्रदर्शन और सरकारी कार्रवाई की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की। UNHRC का 63वां नियमित सत्र जिनेवा में 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है।
नासिर अजीज खान ने UNHRC में एजेंडा आइटम 8 के तहत अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि 5 जून से क्षेत्र में JAAC और उससे जुड़े नागरिक अधिकार आंदोलन के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। उनका बयान गैर-सरकारी संगठन “Coup de Pousse” Chaîne de l’Espoir Nord-Sud की ओर से दिया गया।
खान ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान नागरिकों की मौत, अत्यधिक बल प्रयोग, मनमानी हिरासत, कथित जबरन गुमशुदगी, आवाजाही पर पाबंदियां और संचार सेवाओं को बंद करने जैसी घटनाएं सामने आईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ इलाकों में भोजन, दवाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच प्रभावित हुई। ये आरोप UKPNP और JAAC से जुड़े समूहों द्वारा लगाए गए हैं और सभी मामलों में स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
खान ने शाहजैब हबीब, फहद बरकत, उस्मान नजीर और ओसामा जमील की कथित मौतों का उल्लेख करते हुए इन मामलों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक की मौत सुरक्षा कार्रवाई के दौरान हुई है तो जिम्मेदारी तय करने के लिए विश्वसनीय जांच जरूरी है।
UKPNP प्रवक्ता ने हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के सदस्य लापता बताए जा रहे हैं, उन्हें उनके बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने संचार सेवाओं की बहाली और राजनीतिक व नागरिक गतिविधियों पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग की।
JAAC के अपने मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने भी जून में एक रिपोर्ट जारी कर 5 से 12 जून के बीच मौतों, गिरफ्तारियों, कथित गुमशुदगी, संचार बंद होने और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच प्रभावित होने के आरोप लगाए थे। संगठन ने सभी घटनाओं की स्वतंत्र जांच और मृतकों, घायलों, हिरासत में लिए गए तथा लापता लोगों की सत्यापित सूची सार्वजनिक करने की मांग की थी।
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी जून में क्षेत्र की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की थी। एमनेस्टी ने JAAC पर प्रतिबंध, इंटरनेट बंद किए जाने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और घातक बल के इस्तेमाल की रिपोर्टों पर सवाल उठाए थे। संगठन ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सम्मान करने को कहा था।
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग HRCP की एक तथ्य-जांच रिपोर्ट में भी बाद में कहा गया कि क्षेत्र में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक असंतोष मौजूद है और सरकारी प्रतिक्रिया में कथित अनुपातहीन बल प्रयोग ने अविश्वास और ध्रुवीकरण बढ़ाया। रिपोर्ट ने बातचीत और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।
दूसरी ओर पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्र की सरकार ने JAAC के खिलाफ अपनी कार्रवाई का बचाव किया है। 5 जून को JAAC को एंटी-टेररिज्म कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया था। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि संगठन शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है, लोगों को डराने, नफरत फैलाने और अव्यवस्था पैदा करने जैसी गतिविधियों में शामिल है। JAAC और उसके समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
7 जून को पुलिस की ओर से जारी जानकारी में कहा गया था कि JAAC से जुड़े दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया और कार्रवाई के दौरान हथियार, संचार उपकरण तथा कुछ संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। ये पुलिस के दावे हैं और आरोपियों के खिलाफ कानूनी जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा था कि JAAC की अधिकांश मांगों को पहले ही स्वीकार या लागू किया जा चुका है और शेष मुद्दों पर बातचीत के लिए सरकार तैयार है। जून में पाकिस्तानी संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने दावा किया था कि संगठन की 38 में से 35 मांगों को लागू किया जा चुका है।
इसी पृष्ठभूमि में नासिर अजीज खान ने UNHRC से आग्रह किया कि क्षेत्र की स्थिति पर स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाई जाए और नागरिकों की मौत, हिरासत तथा कथित गुमशुदगी से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने वियना घोषणा और मानवाधिकार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नागरिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
UKPNP ने संचार सेवाओं को बहाल करने, हिरासत में लिए गए शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं की स्थिति स्पष्ट करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर पाबंदी से स्थानीय लोगों के साथ विदेशों में रहने वाले परिवारों का संपर्क भी प्रभावित हुआ।
UNHRC के 63वें सत्र में यह मुद्दा उठने के बाद PoJK की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आई है। एक तरफ UKPNP, JAAC और मानवाधिकार संगठनों ने कथित बल प्रयोग तथा नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंधों की स्वतंत्र जांच की मांग की है, वहीं पाकिस्तान और क्षेत्रीय प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जोड़कर उचित ठहराया है। अब UKPNP ने संयुक्त राष्ट्र से इन परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र जांच और प्रभावित लोगों के अधिकारों की निगरानी की मांग की है।
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