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होर्मुज से फिर बढ़ने लगा कच्चे तेल का निर्यात
दुबई: मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों के खतरे के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आवाजाही में बड़ी तेजी दर्ज की गई है। सितंबर में इस रास्ते से कच्चे तेल का निर्यात करीब 1.65 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो युद्ध के शुरुआती महीनों में आई भारी गिरावट के बाद उल्लेखनीय सुधार है। मार्च में यह आंकड़ा करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर गया था।
तेल निर्यात में यह सुधार ऐसे समय हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है। सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में भी वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। 1 अक्टूबर को एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला होने के बाद उसमें आग लग गई थी। हालांकि जहाज के सभी चालक दल के सदस्यों के सुरक्षित होने की जानकारी दी गई। इस जोखिम के बीच अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों और दूसरे वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जहाज ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर अमेरिकी नौसेना के मार्गदर्शन वाले रास्ते से गुजर रहे हैं। इस दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमान और अटैक हेलीकॉप्टर भी सुरक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। कुछ जहाज संभावित हमलों से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद करके भी जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं।
अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बढ़ाने के लिए एक विशेष समुद्री कॉरिडोर भी तैयार किया है। अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक इस व्यवस्था के तहत रात के समय करीब 15 से 20 टैंकर ओमान के तट के पास दक्षिणी चैनल से जलडमरूमध्य में प्रवेश और निकास कर रहे थे। इससे वैश्विक बाजार में लाखों बैरल तेल प्रतिदिन पहुंचाने में मदद मिली। तेल की सप्लाई बढ़ने के पीछे सिर्फ होर्मुज से गुजरने वाले टैंकर ही नहीं हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े उत्पादक वैकल्पिक पाइपलाइन और दूसरे निर्यात मार्गों का भी इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र के करीब 40 प्रतिशत कच्चे तेल को अब ऐसे रास्तों से भेजा जा रहा है जो होर्मुज को बायपास करते हैं। युद्ध से पहले यह हिस्सा करीब 17 प्रतिशत था।
कच्चे तेल की स्थिति में सुधार के बावजूद डीजल और दूसरे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई अभी सामान्य नहीं हुई है। युद्ध से पहले जहां करीब 36 लाख बैरल प्रतिदिन रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद इस क्षेत्र से गुजरते थे, वहीं हालिया स्तर लगभग 6.77 लाख बैरल प्रतिदिन बताया गया है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खासतौर पर डीजल की उपलब्धता और कीमतों को लेकर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की बढ़ती आवाजाही को हालात पूरी तरह सामान्य होने का संकेत नहीं माना जा सकता। अमेरिकी सैन्य सुरक्षा में जहाजों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर संसाधनों की जरूरत पड़ रही है और लगातार हमलों का जोखिम मौजूद है। ऐसे में होर्मुज से तेल निर्यात भले ही युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच रहा हो, लेकिन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सुरक्षा की चुनौती अभी बनी हुई है।
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