
US-Iran US-ईरान : US-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। US और इज़राइली सेनाओं ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ़ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जो विश्व समुद्री व्यापार के लिए अहम मार्ग है। इस कार्रवाई से भारत, चीन और अन्य तेल आयातक देशों पर तुरंत असर पड़ा।
ईरान ने यूनाइटेड अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों पर भी हमले किए। इन देशों ने US के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ़ प्रतिक्रिया दी, जिससे वैश्विक फ्यूल आपूर्ति प्रभावित हुई। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पिछले महीने कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार चली गई थी। इसके बाद, G7 देशों ने आपातकालीन रिज़र्व से तेल बाजार में सप्लाई बढ़ाई और कीमतों को $100 के नीचे लाया।
इस बीच, US प्रेसिडेंट ट्रंप ने US और ईरान के बीच युद्ध पर दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर लागू करने और बातचीत से विवाद सुलझाने की घोषणा की। इस घोषणा का असर तुरंत तेल बाजार में देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में 15-20% तक की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $94.94 प्रति बैरल पर आ गई, जो 13% से अधिक की गिरावट दर्शाती है। इसी तरह, US WTI क्रूड ऑयल की कीमत $96.46 प्रति बैरल पर आ गई, जो 14.6% की कमी के बराबर है।
US-ईरान युद्ध से पहले क्रूड ऑयल की कीमत $62 से $65 प्रति बैरल के बीच ट्रेड कर रही थी। युद्ध और तनाव के कारण कीमतें बढ़कर $119 प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं। अब सीज़फ़ायर और आपूर्ति बहाली के बाद कीमतें $100 के नीचे लौट गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में यह गिरावट पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर भी असर डाल सकती है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यह राहत की खबर हो सकती है। वहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेल की स्थिरता से व्यापारिक गतिविधियों और उत्पादन लागत पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की सीज़फ़ायर घोषणा और आपूर्ति बहाली ने कच्चे तेल के बाजार में अचानक गिरावट का कारण बना। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर स्थिति स्थिर रहती है तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।





