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ईरानी जहाजों पर संकट, श्रीलंका मदद करने से क्यों बच रहा? जानिए अमेरिका से जुड़ा पूरा मामला
jantaserishta.com
10 Oct 2026 3:16 PM IST

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नई दिल्ली: श्रीलंका के तट से करीब 24 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के 19 जहाज फंसे हैं। इन पर खाने-पीने के सामान, पानी और ईंधन की कमी हो गई है। श्रीलंका को डर है कि सहायता देने से अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जहाज मदद के लिए श्रीलंका के जलक्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें सहायता देना नैतिक जिम्मेदारी होगी।
समुद्र में फंसे ईरान के 19 जहाज
श्रीलंका के तट के पास ईरान के 19 जहाज मुश्किल हालात में फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर खाने-पीने की चीजों, पानी और ईंधन की कमी बताई जा रही है। इसके बावजूद श्रीलंका सरकार फिलहाल उनकी मदद करने को लेकर सावधानी बरत रही है।
सरकार को आशंका है कि ईरानी जहाजों को जरूरी सामान और सुविधाएं देने से अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो के अनुसार, ये जहाज श्रीलंका के तट से करीब 24 समुद्री मील दूर हैं। हालांकि, अमेरिका ने अब तक सहायता देने पर कार्रवाई की कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं दी है।
होर्मुज में नाकेबंदी के बाद बढ़ी परेशानी
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संडे टाइम्स को बताया कि ये ईरान के तेल टैंकर हैं। उनके मुताबिक, होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा शुरू होने के बाद कई ईरानी जहाज फंसे हुए हैं और अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां आवाजाही प्रभावित होने से तेल परिवहन करने वाले जहाजों के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
श्रीलंका के तट के पास पहले भी डूबा था ईरानी युद्धपोत
इस साल मार्च में श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS Dena अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में डूब गया था। रॉयटर्स के मुताबिक, यह घटना गाले शहर से करीब 19 समुद्री मील दूर हुई थी। हादसे में बड़ी संख्या में ईरानी सैनिकों की मौत हुई थी।
इसके बाद एक अन्य ईरानी जहाज को तकनीकी खराबी के कारण श्रीलंका के बंदरगाह पर लाया गया था। उसके घायल नाविकों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज हुआ और बाद में बचाए गए लोगों को सुरक्षित ईरान भेज दिया गया।
अमेरिका और ईरान से रिश्तों के बीच फंसा श्रीलंका
श्रीलंका अभी आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। दूसरी ओर, ईरान भी उसका कारोबारी साझेदार है।
श्रीलंका के अधिकारियों के मुताबिक, जहाजों को सामान और सेवाएं देने वाली कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका से सतर्क हैं। ऐसे में सरकार के सामने मानवीय जरूरतों और अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
विशेषज्ञ बोले- मदद देना नैतिक जिम्मेदारी
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार दयान जयतिलके ने कहा कि श्रीलंका मुश्किल स्थिति में है और उसकी सहायता करने की कुछ व्यावहारिक सीमाएं हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका जानबूझकर मदद से इनकार नहीं कर रहा, बल्कि सावधानी से फैसला लेना चाहता है।
जयतिलके के मुताबिक, ये युद्धपोत नहीं, बल्कि ईरान से चीन तक तेल ले जाने वाले मालवाहक जहाज हैं। यदि इन पर हमला होता है और ये सहायता के लिए श्रीलंका के जलक्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें तुरंत मदद देना देश की नैतिक जिम्मेदारी होगी।
फिलहाल श्रीलंका सरकार अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेने की बात कह रही है। अब देखना होगा कि वह फंसे जहाजों की जरूरतों और अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।
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