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Bangladesh बांग्लादेश: हाल की घटनाओं और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर सीपीआई(एम) नेता मोहम्मद सलीम ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है, क्योंकि बांग्लादेश में अब तक प्रभावी सरकार नहीं है और वहां लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता कमजोर की जा रही है। मोहम्मद सलीम ने बताया कि अमेरिका, सऊदी अरब और पाकिस्तान की संयुक्त कोशिशों ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप देश में सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, मीडिया कर्मियों, मजदूर दलों, कम्युनिस्ट पार्टियों, श्रमिक संगठनों और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को दबाया जा रहा है।
सलीम ने कहा कि यह स्थिति न केवल बांग्लादेश के आंतरिक लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरनाक है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और मानवाधिकारों के लिए भी गंभीर चुनौती पेश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी हस्तक्षेप और स्थानीय शासकीय नीतियों के कारण देश में असंतोष और सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। सीपीआई(एम) नेता ने कोलकाता में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उनकी पार्टी बांग्लादेश की जनता के साथ है और वहां की सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए आवाज उठा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय समुदाय ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो देश की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष संस्थाएं पूरी तरह कमजोर हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हाल के वर्षों में मीडिया पर नियंत्रण और विपक्षी दलों की दबाई बढ़ी है। स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर लगातार धमकियां और गिरफ्तारी हो रही हैं। इसके अलावा, श्रमिक संगठनों और कम्युनिस्ट पार्टियों के शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन भी दबाए जा रहे हैं। सीपीआई(एम) ने बांग्लादेश में हो रही घटनाओं के खिलाफ भारत में जनजागरण अभियान भी चलाया है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी संभव है। सलीम ने भारतीय नागरिकों से अपील की कि वे बांग्लादेश में मानवाधिकारों और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए जागरूक रहें और शांतिपूर्ण तरीके से समर्थन और विरोध दोनों ही स्वरूपों में सक्रिय हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश की मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर सांप्रदायिक सौहार्द और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की रक्षा अति आवश्यक है। इसके लिए सभी लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
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