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हैलोवीन के जश्न पर पाकिस्तान में विवाद संस्कृति और मनोरंजन पर बहस

nidhi
1 Nov 2026 2:05 PM IST
हैलोवीन के जश्न पर पाकिस्तान में विवाद संस्कृति और मनोरंजन पर बहस
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हैलोवीन को पाकिस्तान में भी शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को मनाया गया। कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे प्रमुख शहरों में कई जगहों, शॉपिंग सेंटरों और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में इससे जुड़े खास कार्यक्रम आयोजित किए गए। लाहौर के एम्पोरियम मॉल जैसे बड़े शॉपिंग सेंटरों ने युवाओं और परिवारों को आकर्षित करने के लिए 'हाउस ऑफ हॉरर्स' और 'विक्टोरियन मर्डर-हाउस' जैसी डरावनी थीम पेश कीं। लाहौर की यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UET) सहित कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के छात्रों की डरावनी वेशभूषा पहने हुए वीडियो क्लिप्स तेजी से चर्चा का विषय बन गईं। क्यों? क्योंकि कई लोगों का मानना ​​है कि यह इस्लामी मूल्यों के खिलाफ है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

पाकिस्तान में हैलोवीन मनाने पर आलोचना
लाहौर, कराची और अन्य शहरों सहित पूरे पाकिस्तान में लोगों ने शनिवार, 31 अक्टूबर को हैलोवीन मनाया। इसमें डरावनी थीम वाली पोशाकें, 'हॉन्टेड हाउस' (भूतिया घर) और 'विक्टोरियन मर्डर-हाउस' जैसी चीजें शामिल थीं, जिन्हें खास तौर पर शहरी युवाओं और परिवारों को लुभाने के लिए तैयार किया गया था। UET समेत कई संस्थानों में भी ऐसे जश्न देखे गए। इंटरनेट पर सामने आए इन आयोजनों के वीडियो चर्चा का विषय बन गए; कई लोगों ने इसे 'शैतानी संस्कृति' करार दिया और दावा किया कि इस्लाम में यह वर्जित है।
सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की, "पाकिस्तान में आखिर क्या बढ़ावा दिया जा रहा है? यह तो शैतानी है!" एक अन्य उपयोगकर्ता ने कहा, "इनमें से किसी को भी हैलोवीन मनाने के पीछे की असल वजह नहीं पता। बस 'कूल' दिखने के लिए ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं। अल्लाह हम सबको हिदायत दे।" लेकिन क्या हैलोवीन वाकई कोई शैतानी प्रथा है? आइए समझते हैं।
हैलोवीन की शुरुआत कहाँ से हुई और यह विवादित क्यों है?
हैलोवीन मूल रूप से कोई शैतानी उत्सव नहीं है, हालांकि पाकिस्तान में कई रूढ़िवादी और धार्मिक समूहों का मानना ​​है कि इसकी जड़ें 'पैगन' (गैर-ईसाई/प्राचीन मूर्तिपूजक) परंपराओं से जुड़ी हैं और यह इस्लामी मूल्यों के खिलाफ है।
माना जाता है कि हैलोवीन की शुरुआत प्राचीन 'सेल्टिक' परंपराओं और 'सैमहेन' (Samhain) जैसे फसल उत्सवों से हुई थी। उस समय लोग अलाव जलाते थे और अजीबोगरीब वेशभूषा पहनते थे, क्योंकि उनका मानना ​​था कि ऐसा करने से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं।
पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम बहुल देशों में कई इस्लामी विद्वानों और समुदाय के लोगों का मानना ​​है कि हैलोवीन के जश्न में शामिल होना 'हराम' (वर्जित) है। उनका तर्क है कि इसकी प्राचीन प्रथाओं में अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र से जुड़ी कल्पनाएँ और गैर-मुस्लिम परंपराओं की नकल शामिल है।
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