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किन्शासा: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में विद्रोही समूह M23 ने सरकार के साथ शांति वार्ता से इनकार कर दिया है। समूह ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बताया है, जिससे संघर्ष के जल्द समाप्त होने की उम्मीदों को झटका लगा है।
M23 का रुख क्यों बदला?
- विद्रोही गुट का कहना है कि जब तक उन पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, वे बातचीत की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।
- M23 के नेताओं का आरोप है कि सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें राजनीतिक मान्यता नहीं दे रहे।
- उनका यह भी दावा है कि सेना की आक्रामक कार्रवाई के बीच शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं है।
कांगो में क्या चल रहा है?
- M23 विद्रोही समूह लंबे समय से पूर्वी कांगो में सक्रिय है और रवांडा से समर्थन मिलने के आरोप लगते रहे हैं।
- बीते महीनों में विद्रोहियों और कांगो सेना के बीच झड़पें तेज हुई हैं, जिससे हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
- अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार इस संघर्ष को रोकने की अपील कर रहे हैं, लेकिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और संभावित असर
- संयुक्त राष्ट्र, अफ्रीकी संघ और पश्चिमी देश M23 पर दबाव बना रहे हैं कि वे हिंसा छोड़कर बातचीत करें।
- कांगो सरकार का कहना है कि बिना शर्त वार्ता ही समाधान हो सकती है, लेकिन M23 के इनकार के बाद तनाव और बढ़ सकता है।
- अगर बातचीत शुरू नहीं हुई, तो सरकार विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर सकती है।
क्या आगे स्थिति सुधर सकती है?
M23 के वार्ता से इनकार के बाद कांगो में संघर्ष लंबा खिंच सकता है। सरकार अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ विद्रोहियों पर दबाव बना रही है, लेकिन बिना राजनीतिक समाधान के यह संकट और गहरा सकता है।
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