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14 नाविक भी शामिल; विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में अब तक 22 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें 14 नाविक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार, 28 अक्टूबर को नियमित मीडिया ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। उन्होंने क्षेत्र के हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए है। मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब में भी तीन भारतीयों की जान गई है। विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के साथ नागरिक ठिकानों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। संघर्ष का असर क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नागरिकों और वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों पर भी पड़ा है। फरवरी से जारी संकट में हुई मौतों के इस आंकड़े ने भारतीय समुदाय के सामने मौजूद जोखिम को फिर उजागर किया है।
विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?
रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग में बताया कि भारत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर बेहद चिंतित है। उन्होंने पुष्टि की कि अब तक जान गंवाने वाले 22 भारतीयों में 14 समुद्री पेशेवर हैं। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार अपनी ओर से भारतीय समुदाय की सुरक्षा और उनकी भलाई सुनिश्चित करने के लिए संपर्क में है। उन्होंने सऊदी अरब में तीन भारतीय नागरिकों की मौत का भी उल्लेख किया। यह संख्या क्षेत्र में हुई कुल 22 मौतों से जुड़ी जानकारी का हिस्सा है। मंत्रालय के बयान में सभी मृतकों के नाम और प्रत्येक घटना का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। इसलिए अलग-अलग घटनाओं में हुई मौतों को जोड़ते समय आधिकारिक कुल आंकड़े को ध्यान में रखना आवश्यक है।
समुद्री मार्गों पर काम करने वाले भारतीयों पर असर
जान गंवाने वालों में 14 नाविकों का शामिल होना समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिम की गंभीरता दर्शाता है। पश्चिम एशिया के आसपास के जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में तनाव बढ़ने का सीधा असर जहाजों की आवाजाही तथा उनके चालक दल की सुरक्षा पर पड़ता है। हाल के घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले परिवहन में व्यवधान और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हमलों ने चिंता बढ़ाई है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब को लाल सागर की ओर तेल पहुंचाने का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराती है। समुद्री मार्ग बाधित होने की स्थिति में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। ऐसे प्रतिष्ठानों पर हमले व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा करते हैं।
सऊदी अरब में हमलों पर भारत जता चुका है विरोध
सऊदी अरब में नागरिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की भारत पहले भी निंदा कर चुका है। 21 अक्टूबर को दम्माम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई थी। अन्य भारतीयों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अक्टूबर में अलग-अलग मौकों पर सऊदी अरब के नागरिक और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। वहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रोजगार के लिए रहते हैं। इसलिए सुरक्षा हालात बिगड़ने का असर कामगारों, उनके परिवारों और यात्रा करने वाले भारतीयों तक पहुंच रहा है।
भारतीय मिशन समुदाय के संपर्क में
विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में भारतीय राजनयिक मिशन घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। भारतीय कामगारों और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत नाविकों की सुरक्षा तथा कल्याण के लिए समुदाय से संपर्क बनाए रखा जा रहा है। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए मिशनों की सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया है। सऊदी अरब में उड़ानों में व्यवधान से प्रभावित भारतीयों, विशेषकर उमराह यात्रियों की सहायता के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास एयरलाइनों और सामुदायिक संगठनों के संपर्क में है। उपलब्ध उड़ानों के बारे में जानकारी साझा की जा रही है, ताकि प्रभावित यात्री अपनी वापसी की व्यवस्था कर सकें। यात्रियों से पुष्ट बुकिंग के बिना हवाईअड्डे नहीं जाने और उड़ान की स्थिति सीधे विमानन कंपनी से जांचने को कहा गया है।
बातचीत और कूटनीति से समाधान पर जोर
भारत लगातार पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है। नई दिल्ली का रुख है कि क्षेत्र में तनाव कम होना और शांति बहाल होना जरूरी है। हाल में हूती समूह के सऊदी अरब पर हमलों से स्थिति में फिर तनाव बढ़ा है। बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले इस रास्ते में व्यवधान अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को प्रभावित कर सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, समुद्री आवाजाही और क्षेत्रीय स्थिरता आपस में जुड़े मुद्दे बने हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने समुदाय से संपर्क बनाए रखने और उनकी सहायता के प्रयास जारी रखने की बात दोहराई है।
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