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पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण पर चिंता
Ratna Netam
22 Oct 2026 6:41 PM IST

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हैदराबाद (पाकिस्तान)। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता जताई गई है। सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर में आयोजित अंतर-धार्मिक संवाद कार्यक्रम में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश में धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए दशकों से किए जा रहे प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। कार्यक्रम में हिंदू लड़कियों के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन, जबरन विवाह और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम का आयोजन क्रिश्चियन स्टडी सर्कल द्वारा हैदराबाद के एक स्थानीय होटल में किया गया। इसमें राजनीतिक प्रतिनिधियों, धार्मिक नेताओं, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने धार्मिक कट्टरता, भेदभाव और कमजोर समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।
हिंदू लड़कियों के अपहरण और धर्मांतरण पर चिंता
नेशनल असेंबली की पूर्व सदस्य नीलम कुमारी ने कार्यक्रम में हिंदू लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंध प्रांत में हिंदू लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।नीलम कुमारी ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून का उल्लंघन हैं और संबंधित अधिकारियों को पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिएउन्होंने बताया कि उमरकोट से कथित तौर पर अपहृत एक लड़की की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में वह उमरकोट और घोटकी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के संपर्क में हैं।हालांकि, संबंधित मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
धार्मिक सद्भाव के प्रयासों पर उठे सवाल
अंतर-धार्मिक संवाद में शामिल वक्ताओं ने कहा कि पाकिस्तान में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास और सम्मान बढ़ाने के लिए लंबे समय से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।इसके बावजूद धार्मिक अल्पसंख्यकों को कई सामाजिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।वक्ताओं के अनुसार, धार्मिक सद्भाव केवल सम्मेलनों और सार्वजनिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका प्रभाव समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा और न्याय तक उनकी पहुंच में भी दिखाई देना चाहिए।उन्होंने सरकार और धार्मिक संगठनों से आग्रह किया कि वे भेदभाव तथा हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए मिलकर काम करें।
सिंध में जबरन धर्मांतरण के मामले चिंता का विषय
सिंध प्रांत में हिंदू और ईसाई समुदाय की लड़कियों से जुड़े जबरन धर्मांतरण के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं।अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के कथित अपहरण, जबरन धर्मांतरण और विवाह की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई थी।संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2025 में रिपोर्ट किए गए ऐसे मामलों में लगभग 75 प्रतिशत प्रभावित महिलाएं और लड़कियां हिंदू समुदाय तथा 25 प्रतिशत ईसाई समुदाय से थीं। लगभग 80 प्रतिशत घटनाएं सिंध प्रांत में सामने आई थीं।
दो हिंदू बहनों की घर वापसी का मामला भी चर्चा में
हाल ही में सिंध हाई कोर्ट ने दो नाबालिग हिंदू बहनों को उनके माता-पिता के पास लौटने की अनुमति दी थी13 और 14 वर्षीय इन बहनों का अगस्त 2026 में कथित तौर पर अपहरण किया गया था। परिवार का आरोप था कि उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर अधिक उम्र के पुरुषों से विवाह कराया गया।20 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, सिंध हाई कोर्ट की हैदराबाद पीठ के आदेश के बाद दोनों बहनें अपने परिवार से मिल सकीं।इस मामले ने भी नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और जबरन विवाह से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर चर्चा बढ़ाई है।
कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। उनका उचित और निष्पक्ष तरीके से क्रियान्वयन भी आवश्यक है।उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि कथित अपहरण और जबरन विवाह की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए तथा पीड़ित परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।ब्रिटेन सरकार की सितंबर 2026 में अद्यतन देश-संबंधी रिपोर्ट में भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के कथित जबरन धर्मांतरण से जुड़े मामलों में कमजोर जांच और शिकायतों पर अपर्याप्त कार्रवाई जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
कार्यक्रम में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक प्रतिनिधियों ने कहा कि सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए।उन्होंने नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा, जबरन विवाह की रोकथाम और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की मांग की।वक्ताओं ने अंतर-धार्मिक संवाद को जारी रखने के साथ ठोस कानूनी और सामाजिक कदम उठाने पर जोर दिया।यह कार्यक्रम पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, महिलाओं के अधिकारों और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जारी बहस के बीच आयोजित हुआ।
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