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बांग्लादेश पर चिंता: 37 दिग्गज हस्तियों ने चरमपंथ पर चेताया

Tara Tandi
14 Oct 2026 4:59 PM IST
बांग्लादेश पर चिंता: 37 दिग्गज हस्तियों ने चरमपंथ पर चेताया
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ढाका: बांग्लादेश में बढ़ते धार्मिक चरमपंथ को लेकर 37 से ज़्यादा जाने-माने नागरिकों ने चेतावनी दी है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 37 प्रमुख बांग्लादेशी नागरिकों ने ढाका यूनिवर्सिटी के एक टीचर को एक स्टूडेंट के पहनावे पर कथित टिप्पणी के लिए सज़ा देने की मांग और राजधानी में रवींद्रनाथ टैगोर के म्यूरल (दीवार पर बनी पेंटिंग) को खराब करने की एक अलग घटना पर गहरी चिंता जताई है। मंगलवार को जारी एक बयान में उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी बढ़ती घटनाओं से धार्मिक चरमपंथियों को बढ़ावा मिल सकता है और बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने दोनों घटनाओं की निष्पक्ष जांच और इसमें शामिल लोगों को सज़ा देने की मांग की। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका यूनिवर्सिटी में क्लासरूम के अंदर हुए एक विवाद को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। इसमें एक मास्टर स्टूडेंट ने इंग्लिश डिपार्टमेंट की टीचर तस्नीम सिराज महबूब पर स्टूडेंट्स के पहनावे और आर्थिक हालात पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया, जबकि टीचर ने इन आरोपों से इनकार किया।
हाल ही में सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि महबूब ने नकाब (चेहरे का पर्दा) पहनने वाली एक क्लासमेट से कहा था कि वह इतनी सख्ती से पर्दा करने के बजाय अपना चेहरा, हाथ और पैर खुला रख सकती है। इस बातचीत के बाद, वह स्टूडेंट और दो अन्य लोग क्लासरूम से बाहर चले गए। बाद में उसने एक स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन की ओर से यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन को लिखित शिकायत दी और टीचर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, महबूब ने सोशल मीडिया पोस्ट में इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने न तो स्टूडेंट से कपड़े बदलने या नकाब हटाने के लिए कहा और न ही उसे क्लासरूम से बाहर जाने का निर्देश दिया।
'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने आरोप लगाया कि इस घटना का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पहनावे की आज़ादी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और गलतफहमियों को राजनीतिक रंग देने के बजाय बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। बयान में 9 अक्टूबर को ढाका के सेगुनबागीचा इलाके में शिल्पाकला एकेडमी की दीवार पर 'राष्ट्र संलाप फोरम' के बैनर तले कुछ लोगों द्वारा टैगोर की तस्वीर को खराब करने की घटना की भी निंदा की गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई वीडियो में एक महिला को ब्रश से टैगोर के म्यूरल पर काली स्याही पोतते हुए देखा गया। शाहबाग पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने बीच-बचाव किया और उसे उस जगह से हटाया।
महिला और उसके साथियों के हंगामे के बाद, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और वैन में ले गई। बांग्लादेशी अखबार 'ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के दौरान इस समूह को नारे लगाते हुए भी सुना गया। बयान पर हस्ताक्षर करने वालों के अनुसार, ये दोनों घटनाएं धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाने की एक जैसी कोशिश से जुड़ी थीं, जिससे चरमपंथ को बढ़ावा मिल सकता है और सांप्रदायिक व सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 1960 के दशक में पाकिस्तानी शासकों ने टैगोर को राजनीतिक रूप से मुस्लिम-विरोधी के तौर पर पेश किया था, और उस अभियान की तुलना हाल ही में उनकी तस्वीर को विरूपित करने की घटना से की।
बयान में कहा गया, "भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति मानवता की अविभाज्य और साझा विरासत हैं," और इस बात पर ज़ोर दिया गया कि सांस्कृतिक परंपराओं को बांटने के लिए किसी भी धार्मिक, भौगोलिक या वैचारिक मतभेद का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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