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Russia, में बढ़ी तेल संकट की चिंता, पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर दी प्रतिक्रिया

Ratna Netam
29 Jun 2026 3:12 PM IST
Russia, में बढ़ी तेल संकट की चिंता, पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर दी प्रतिक्रिया
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गंभीर होते नजर आ रहे हैं।

Russia रूस : रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच हालात एक बार फिर गंभीर होते नजर आ रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार यह स्वीकार किया है कि यूक्रेन के हालिया हमलों से रूस को नुकसान हुआ है और देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।

पुतिन ने कहा है कि रूस अपने तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत करेगा और ईंधन उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमलों के चलते रूस के भीतर ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों को तेज कर दिया है। इन हमलों में विशेष रूप से तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारण इकाइयों को निशाना बनाया गया है, जिससे रूस की आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रविवार को ‘टेलीग्राम’ पर बयान जारी करते हुए दावा किया कि यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोनों ने रूस की दो बड़ी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। उनके अनुसार, ये हमले रूस की सैन्य और आर्थिक संरचना को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे पर हो रहे इन हमलों का असर न केवल युद्ध के मैदान पर, बल्कि रूस की घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल और गैस रूस की अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा हैं, ऐसे में रिफाइनरियों और उत्पादन इकाइयों पर हमले देश की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकते हैं।

दूसरी ओर, रूस का कहना है कि वह अपने महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत कर रहा है तथा किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। हालांकि लगातार हो रहे ड्रोन हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर किया है।युद्ध के इस चरण में ड्रोन तकनीक का उपयोग दोनों पक्षों के लिए एक अहम रणनीतिक हथियार बन गया है। यूक्रेन द्वारा किए जा रहे लंबी दूरी के हमलों ने रूस के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और ईंधन आपूर्ति प्रणाली पर नया दबाव पैदा कर दिया है।फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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