विश्व

अमेरिका से भिड़ना पड़ा भारी कनाडा पर बढ़ा टैरिफ का दबाव

Ratna Netam
22 Aug 2026 4:05 PM IST
अमेरिका से भिड़ना पड़ा भारी कनाडा पर बढ़ा टैरिफ का दबाव
x
ओटावा : अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेड वार्ता टूटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा के कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला लागू कर दिया है। इसके जवाब में कनाडा ने भी सख्त रुख अपनाते हुए बातचीत रोकने और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मामला उस समय बिगड़ा जब अमेरिका और कनाडा के अधिकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे थे। दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन आखिरी समय में सहमति नहीं बन पाई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आरोप लगाया कि अमेरिका की ओर से बातचीत के अंतिम चरण में कुछ ऐसी शर्तें रखी गईं, जिन्हें कनाडा ने अनुचित माना। इसके बाद कनाडा ने वार्ता रोकने का फैसला किया।
अमेरिका की ओर से लगाए गए नए टैरिफ के तहत कनाडा से आने वाले कई उत्पाद प्रभावित होंगे। इनमें कुछ औद्योगिक सामान, उपभोक्ता वस्तुएं और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम कनाडा की व्यापार नीतियों और अमेरिकी कंपनियों के साथ कथित असमान व्यवहार के जवाब में उठाया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों, किसानों और कामगारों के हितों की रक्षा करना है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कनाडा के साथ व्यापार में संतुलन लाने और अमेरिकी उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था।
वहीं कनाडा ने अमेरिकी फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने कर्मचारियों और उद्योगों की सुरक्षा के लिए जवाबी कदम उठाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के बराबर ही प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
दोनों देशों के बीच यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और कनाडा लंबे समय से मजबूत व्यापारिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हर साल अरबों डॉलर का व्यापार होता है। ऐसे में टैरिफ बढ़ने से कंपनियों, उपभोक्ताओं और उद्योगों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी हो सकता है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से काफी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में लंबे समय तक जारी रहने वाला व्यापार तनाव दोनों देशों के कारोबार और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
इस विवाद की शुरुआत व्यापार नीतियों, बाजार पहुंच और विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर हुई। अमेरिका का आरोप है कि कनाडा कुछ अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभाव करता है, जबकि कनाडा का कहना है कि वह अपने घरेलू उद्योगों और कामगारों के हितों की रक्षा कर रहा है।
ट्रेड वार्ता टूटने के बाद अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दबाव बढ़ गया है। कारोबारी जगत की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या यह विवाद लंबे समय तक जारी रहेगा।
अगर टैरिफ विवाद बढ़ता है तो इसका असर केवल अमेरिका और कनाडा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। निवेशक और उद्योग इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल अमेरिका ने अपना फैसला लागू कर दिया है और कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आगे की रणनीति से तय होगा कि यह व्यापारिक टकराव कितना लंबा चलता है।
Next Story