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आपातकाल के खिलाफ प्रदर्शन
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और प्रांतीय सरकार के निलंबन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस तथा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों के बीच झड़पें हुई हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और गोलियां चलाईं। प्रांतीय प्रशासन ने सीधे गोली चलाने के आरोप को खारिज किया है। प्रशासन के अनुसार, हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़े मामलों में करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आतंकवाद निरोधक कानून के तहत चार मामले दर्ज करने की जानकारी भी दी गई है।
मंगलवार को हुए प्रदर्शनों में सबसे गंभीर झड़पें पेशावर से करीब 15 किलोमीटर दूर बारा इलाके में सामने आईं। पीटीआई नेताओं के मुताबिक, प्रांत में हुई झड़पों में पांच लोग घायल हुए। पार्टी के क्षेत्रीय नेतृत्व ने दावा किया कि कार्यकर्ता प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने पुलिस पर निहत्थे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। घायलों की संख्या पार्टी की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित है।
पीटीआई के अनुसार, बारा में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस का इस्तेमाल किया और सीधे गोलीबारी की। पार्टी ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का प्रयास बताया। पीटीआई प्रवक्ता और इमरान खान के सहयोगी जुल्फिकार बुखारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए और उन्हें बारा बाजार की घटना से जोड़ा। हालांकि, गोलीबारी से संबंधित वीडियो तथा दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, प्रांतीय प्रशासन की सूचना संबंधी अधिकारी समर हारून बिलौर ने पुलिस द्वारा सीधे गोली चलाने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि गुमनाम सोशल मीडिया खातों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए तैयार वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं। प्रशासन ने दावा किया कि पुलिस ने दंगों और तोड़फोड़ के जवाब में नियंत्रित कार्रवाई की। इस प्रकार प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के सवाल पर पीटीआई और प्रशासन ने अलग-अलग विवरण प्रस्तुत किए हैं।
पेशावर पुलिस ने भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील करते हुए बारा में स्थिति नियंत्रण में होने की जानकारी दी। पुलिस के बयान में करीब 50 लोगों को अशांति पैदा करने के आरोप में गिरफ्तार करने का उल्लेख है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून व्यवस्था बाधित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। जिला पुलिस अधिकारी के विवरण के अनुसार, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और हवाई फायरिंग का इस्तेमाल किया गया।
बारा में राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण यानी नादरा के कार्यालय में आग लगाए जाने की घटना भी सामने आई है। पीटीआई के सूचना सचिव इकराम खटाना ने कहा कि अज्ञात लोगों ने कार्यालय में आग लगाई और आसपास के कार्यालयों में घुस गए। प्रशासन ने बताया कि घटना की जिम्मेदारी जांच के आधार पर तय की जाएगी। इसके लिए वीडियो और गवाहों के बयानों का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। आगजनी में शामिल लोगों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में संघीय सरकार द्वारा खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू करना है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित करने के निर्णय को मंजूरी दी। केंद्र ने बढ़ती उग्रवादी हिंसा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को इसकी वजह बताया। पीटीआई ने इस तर्क को खारिज करते हुए कदम को राजनीतिक नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कहा है। प्रांतीय नेताओं को हिरासत में लेने की घटनाओं ने भी विवाद बढ़ाया है। पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के भाई मोहम्मद आमिर ने पेशावर हाई कोर्ट में उनकी बरामदगी के लिए याचिका दी है। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सुरक्षा स्थिति का हवाला देकर केंद्र के फैसले का बचाव किया है। फिलहाल करीब 50 गिरफ्तारियों की प्रशासनिक पुष्टि है, जबकि प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलीबारी का आरोप विवादित बना हुआ है।
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