
Balochistan बलूचिस्तान: कई जिलों में ‘ऑपरेशन हेरोफ’ की पहली वर्षगांठ पर हालात तनावपूर्ण बने रहे। इस दौरान सुरक्षाबलों और बलूच लड़ाकों के बीच कई मुठभेड़ हुईं, सड़कों पर नाकेबंदी की गई और कई जिलों में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू रहीं। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पिछले साल 25 अगस्त को ‘ऑपरेशन हेरोफ’ की शुरुआत की थी, जिसे उन्होंने बलूचिस्तान को पुनः हासिल करने की व्यापक मुहिम का पहला चरण बताया। रिपोर्टों के अनुसार, मस्तुंग जिले के आमाच डैम के पास सुरक्षाबलों और बलूच लड़ाकों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और घायल हुए। शव और घायल हेलीकॉप्टर से क्वेटा ले जाया गए, जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।
सिबी के मिथरी इलाके में एक सुरक्षा चौकी पर हमला हुआ, जबकि तुरबत शहर में ब्लॉकेड के दौरान ग्रेनेड हमले में दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए। पाकिस्तानी रेलवे ने क्वेटा से पेशावर जाने वाली 'जाफर एक्सप्रेस' की सेवाएं सोमवार और मंगलवार को स्थगित कर दी। केच जिले के नसीराबाद इलाके में बाजार कई दिनों से बंद हैं, और दुकानें खोलने की कोशिश करने वाले दुकानदारों को हिरासत में लिया गया, जिससे आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई। जियारत में सहायक आयुक्त अफजल बाक़ी और उनके बेटे के अपहरण के बाद से एक सप्ताह से अधिक समय से कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी हुई है। यहां स्कूल, कॉलेज और दुकानें बंद हैं, और नागरिक खाद्य सामग्री और शिक्षा में बाधा की शिकायत कर रहे हैं। हब और लसबेला में सड़कों पर तलाशी और गश्त बढ़ा दी गई है, और यात्री बसों को शहरों में प्रवेश से रोका जा रहा है। इंटरनेट, मोबाइल और बैंकिंग सेवाएं भी कई जिलों में पहले ही निलंबित हैं।
तुरबत में यात्रियों ने एम-8 हाईवे पर धरना दिया और फ्रंटियर कॉर्प्स की चौकियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। परिवहन संचालकों ने कहा कि कराची से मकरान डिवीजन जाने वाली बसों को बार-बार रोका और जांचा जा रहा है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। राजनीतिक दलों ने पाबंदियों की आलोचना की और कहा कि सरकार हमलों को रोकने में असफल रही है, जबकि आम नागरिक सुरक्षा के नाम पर परेशान हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से नीतियों की समीक्षा कर कर्फ्यू और अन्य पाबंदियों को हटाने की मांग की।





