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रूस में जैविक हथियार बनाने का दावा 'प्लेग मिस्ट्री' पर ट्रंप का बड़ा बयान

Rajeshwari Nishad
8 Oct 2026 3:34 PM IST
रूस में जैविक हथियार बनाने का दावा  प्लेग मिस्ट्री पर ट्रंप का बड़ा बयान
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वॉशिंगटन/मॉस्को। रूस की एक अत्यधिक संवेदनशील प्रयोगशाला में काम करने वाली महिला कर्मचारी की रहस्यमयी मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबेरिया स्थित प्लेग अनुसंधान संस्थान की 28 वर्षीय कर्मचारी दारिया शिपिलोवा की मौत के बाद रूस में संभावित संक्रमण और जैविक हथियारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को कहा कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल इस घटना को किसी जैविक हथियार से जुड़ा मामला नहीं मानता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी सच्चाई सामने आने में समय लग सकता है। दूसरी ओर रूस ने प्रयोगशाला से जुड़ी घटना को लेकर मीडिया रिपोर्टों की आलोचना की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कुछ खबरों को गलत और भ्रामक बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी रूस से घटना की विस्तृत जानकारी मांगी है।
रूस की प्रयोगशाला में महिला कर्मचारी की रहस्यमयी मौत
मामला रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़ा है। इस संस्थान में प्लेग और अन्य खतरनाक संक्रामक बीमारियों का अध्ययन किया जाता है।रिपोर्टों के मुताबिक, संस्थान में कार्यरत 28 वर्षीय दारिया शिपिलोवा की अक्टूबर की शुरुआत में मौत हो गई। मौत से पहले उन्हें निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए थे।
रूसी अधिकारियों ने उनकी मृत्यु का कारण अज्ञात उत्पत्ति वाला निमोनिया बताया है। हालांकि, बीमारी का सटीक कारण स्पष्ट नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।कुछ मीडिया रिपोर्टों में आशंका जताई गई कि कर्मचारी किसी खतरनाक रोगाणु के संपर्क में आई होंगी। लेकिन रूस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
जैविक हथियार के सवाल पर ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों ने पूछा कि क्या रूस की प्रयोगशाला में हुई मौत किसी जैविक हथियार से संबंधित हो सकती है।इस पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को फिलहाल ऐसा नहीं लगता। उन्होंने संकेत दिया कि जांच और जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
ट्रंप ने रूस की ओर से उपलब्ध कराई जा रही जानकारी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूस दावा कर रहा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन वहां से पर्याप्त जानकारी सामने नहीं आ रही है।ट्रंप ने इस मामले की तुलना कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में चीन से मिलने वाली सीमित सूचनाओं से भी की। हालांकि, उन्होंने रूस पर जैविक हथियार बनाने का आरोप नहीं लगाया।
मीडिया की रिपोर्टों पर भड़का क्रेमलिन
इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद रूस की सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अमेरिकी मीडिया, विशेष रूप से एबीसी न्यूज की रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले से जुड़ी कुछ रिपोर्टों में गलत जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।रूसी अधिकारियों ने कहा कि घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन को निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार दी गई है।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रयोगशाला की कर्मचारी की मौत को प्लेग के पुष्ट संक्रमण या जैविक हथियार से जोड़ने का कोई स्थापित प्रमाण सामने नहीं आया है।हालांकि, मौत के सटीक कारण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल बने हुए हैं।
WHO ने रूस से मांगी विस्तृत जानकारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रूस से अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अब तक प्राप्त जानकारी घटना का पूरा आकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं है। संगठन यह समझना चाहता है कि महिला कर्मचारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या किसी अन्य व्यक्ति के संक्रमित होने का खतरा है।स्वास्थ्य एजेंसी ने बीमारी के कारण, संक्रमण के संभावित स्रोत और प्रयोगशाला में अपनाई गई सुरक्षा प्रक्रियाओं से संबंधित विवरण मांगे हैं।
डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में समय पर और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है।फिलहाल संगठन को ऐसी संपूर्ण जानकारी नहीं मिली है, जिससे घटना के सभी पहलुओं का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जा सके।
करीब 200 लोगों को क्वारंटीन किए जाने की रिपोर्ट
महिला कर्मचारी की मौत के बाद रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए।रिपोर्टों के अनुसार, मृतक महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को निगरानी और क्वारंटीन के दायरे में रखा गया।प्रयोगशाला और संबंधित क्षेत्रों में संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वच्छता तथा कीटाणुशोधन संबंधी कदम भी उठाए गए।
हालांकि, रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी रोस्पोत्रेबनादजोर ने कहा कि मृतक के संपर्क में आए लोगों में प्लेग का कोई पुष्ट मामला नहीं मिला है।रूसी अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल महामारी फैलने का कोई प्रमाण नहीं है। अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि स्थिति नियंत्रण में है।
ट्रंप और पुतिन की बातचीत पर भी विवाद
रूसी प्रयोगशाला में हुई मौत के मामले को लेकर अमेरिका और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत की संभावना भी चर्चा में है।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस विषय पर जल्द बातचीत करेंगे।हालांकि, क्रेमलिन ने स्पष्ट किया कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच इस मुद्दे पर किसी फोन कॉल का कार्यक्रम अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।
रूस ने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर दोनों नेताओं के बीच बातचीत की व्यवस्था की जा सकती है।इस तरह संभावित बातचीत को लेकर वॉशिंगटन और मॉस्को की ओर से अलग-अलग जानकारी सामने आई है।
क्या है न्यूमोनिक प्लेग और कितना खतरनाक है?
न्यूमोनिक प्लेग एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो यर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु के कारण होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है।इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी और निमोनिया जैसे लक्षण हो सकते हैं।उपचार नहीं मिलने पर न्यूमोनिक प्लेग जानलेवा साबित हो सकता है। हालांकि, समय रहते उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने से मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ती है।
कुछ परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति से सांस की बूंदों के माध्यम से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैल सकता है।लेकिन केवल प्लेग का अध्ययन करने वाली प्रयोगशाला में किसी कर्मचारी की मौत होने से यह साबित नहीं होता कि मृत्यु प्लेग से हुई या वहां जैविक हथियार विकसित किए जा रहे थे।
रूस के जैविक हथियार बनाने का कोई प्रमाण नहीं
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रूस की प्रयोगशाला में जैविक हथियार तैयार किया जा रहा था।अभी तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में इस आरोप की पुष्टि करने वाला कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है कि उनका प्रशासन इस घटना को जैविक हथियार से संबंधित नहीं मानता।वहीं रूस ने प्लेग संक्रमण और प्रयोगशाला में किसी खतरनाक घटना से जुड़े अपुष्ट दावों को खारिज किया है।
हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन अब भी विस्तृत जानकारी मांग रहा है। इसलिए मामले की सभी परिस्थितियां स्पष्ट होना बाकी हैं।फिलहाल महिला कर्मचारी की मौत, उसके वास्तविक कारण और संभावित संक्रमण से संबंधित जांच ही इस पूरे मामले का प्रमुख विषय बनी हुई है।
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