
वर्ल्ड | पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान 10 नागरिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई है। यह स्वीकारोक्ति देश में दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों पर सरकार और सेना की चुप्पी देखने को मिलती है।
यह घटना बलूचिस्तान प्रांत में हुई, जहां पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, इस दौरान निर्दोष नागरिक भी इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना का दावा है कि मारे गए लोग संदिग्ध थे, लेकिन परिवारों ने विरोध जताते हुए कहा कि वे बेगुनाह थे और बिना किसी कारण निशाना बनाए गए।
इस घटना के बाद पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय राजनीतिक दलों ने पारदर्शी जांच की मांग की है। बलूचिस्तान में पहले भी ऐसे कई सैन्य अभियान हुए हैं, जिनमें नागरिक हताहत हुए, लेकिन इस बार सरकार द्वारा स्वीकार किया जाना असामान्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे के पीछे अंतरराष्ट्रीय दबाव हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान को लगातार मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य संस्थाओं ने भी पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब यह देखना होगा कि पाकिस्तान सरकार इस घटना पर क्या कदम उठाती है और क्या इसमें किसी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा या नहीं।





