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नैशविल: अमेरिका के टेनेसी राज्य में घातक इंजेक्शन के जरिए मृत्युदंड देने के प्रयास के बाद जीवित बचीं क्रिस्टा पाइक ने लगातार दर्द और बोलने में कठिनाई की शिकायत की है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सामने आए अपने पहले सार्वजनिक बयान में उन्होंने शारीरिक तकलीफ के साथ मानसिक पीड़ा का भी उल्लेख किया। पाइक को 30 सितंबर को मृत्युदंड दिया जाना था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और उन्हें आपात चिकित्सा के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद राज्य की मृत्युदंड प्रक्रिया पर नए सवाल उठे हैं।
पाइक का मामला केवल इंजेक्शन लगाने की तैयारी रुकने का नहीं है। उपलब्ध अदालती आदेश पुष्टि करता है कि मृत्युदंड की दवाएं दिए जाने के बाद उनके वकीलों ने आपात आवेदन किया था। आवेदन में प्रक्रिया रोकने, नसों में लगे कैथेटर हटाने और जीवन बचाने के सभी संभव उपाय करने की मांग की गई। टेनेसी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हुई बातचीत में राज्य ने बताया कि पाइक को मृत घोषित नहीं किया गया था। यह विवरण घटना की प्रकृति स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण आधिकारिक रिकॉर्ड है।
उसी आदेश के अनुसार, राज्य ने अदालत को जानकारी दी कि सुधार विभाग ने आपात चिकित्सा की अनुमति दे दी है और पाइक को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। इस सूचना के बाद उनके वकीलों ने उस समय अपने आवेदन का उद्देश्य पूरा हो जाने की बात स्वीकार की। अदालत ने आवेदन को निष्प्रयोज्य मानकर खारिज किया। इसका अर्थ यह नहीं था कि पाइक की मौत की सजा समाप्त कर दी गई। आदेश तत्काल चिकित्सा और उस समय प्रस्तुत आपात मांगों की स्थिति से संबंधित था।
एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, नैशविल की रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दी गई थीं। प्रक्रिया देखने वाले उनके वकील रैंडी स्पाइवी ने अदालत में दाखिल बयान में दावा किया कि टीम को नसों में दवा देने के लिए लाइन स्थापित करने में कठिनाई हुई। उन्होंने कई बार सुई लगाने के प्रयास और नस को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त किए जाने का उल्लेख किया। ये वकील के प्रत्यक्षदर्शी विवरण पर आधारित दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र समीक्षा का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
स्पाइवी के विवरण में पाइक द्वारा बांह में दर्द और जलन बताने की बात भी है। दूसरी ओर, टेनेसी के सुधार विभाग ने पहले कहा था कि उसने राज्य की स्वीकृत प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का पालन किया। इस तरह वकीलों के सवाल और विभाग का पक्ष अलग-अलग हैं। किस स्तर पर क्या समस्या हुई, इसका प्रमाणित उत्तर समीक्षा और संबंधित कार्यवाही से सामने आना बाकी है। केवल प्रक्रिया विफल होने से उसके प्रत्येक तकनीकी कारण का अपने आप निर्धारण नहीं होता।
पाइक के वकीलों ने मृत्युदंड के प्रयास से पहले भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आपत्तियां उठाई थीं। डेथ पेनल्टी इन्फॉर्मेशन सेंटर के विवरण के अनुसार, उनकी ओर से नसों तक पहुंच बनाने और प्रक्रिया के दौरान आपात चिकित्सा की व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। संस्था ने इस घटनाक्रम को राज्य की मृत्युदंड व्यवस्था पर पहले से चल रही बहस के संदर्भ में रखा है। हालांकि, किसी पक्ष द्वारा पहले चेतावनी दिया जाना और जांच में उस चेतावनी का कारण सिद्ध होना अलग प्रश्न हैं।
इस घटना से पहले भी टेनेसी में एक अन्य दोषी टोनी कैरदर्स को मृत्युदंड देने का प्रयास नस में लाइन स्थापित नहीं हो पाने के कारण रोका गया था। डेथ पेनल्टी इन्फॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, उसके बाद प्रक्रिया की तैयारी और स्वतंत्र समीक्षा को लेकर मांगें उठी थीं। पाइक मामले ने उन सवालों को फिर प्रमुख बना दिया है। चर्चा अब केवल इस्तेमाल की गई दवा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे देने की व्यवस्था, प्रशिक्षित कर्मियों और आपात स्थिति में निर्णय लेने की प्रक्रिया तक जाती है।
पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सजा मिली थी। उस समय पाइक 18 वर्ष की थीं। अपने हालिया बयान में उन्होंने पीड़िता के परिवार के दुख का भी उल्लेख किया। इस मामले की रिपोर्टिंग में दोनों तथ्य साथ रखना आवश्यक है—पाइक हत्या के मामले में दोषसिद्ध हैं और मृत्युदंड लागू करने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अलग जांच तथा न्यायिक परीक्षण का विषय हैं।
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