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चीन के नए जातीय एकता कानून का विदेशों में विरोध

Ratna Netam
10 Oct 2026 7:34 PM IST
चीन के नए जातीय एकता कानून का विदेशों में विरोध
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न्यूयॉर्क। चीन के नए 'जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून' को लेकर विदेशों में रहने वाले चीनी लोकतंत्र समर्थक संगठनों, विद्वानों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है। इन संगठनों ने आरोप लगाया है कि नया कानून चीन की सरकार की कथित आत्मसातीकरण नीतियों को और मजबूत कर सकता है। उनका कहना है कि इससे देश में रहने वाले जातीय अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक अधिकार प्रभावित होने का खतरा है। इसी मुद्दे पर अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित फ्लशिंग में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और विद्वानों ने हिस्सा लिया।सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सम्मेलन का आयोजन 'बीजिंग स्प्रिंग' पत्रिका, 'चाइनीज अलायंस फॉर डेमोक्रेसी' और 'चाइना डेमोक्रेसी पार्टी' की कार्यकारी समिति ने संयुक्त रूप से किया। यह कार्यक्रम ताइवान के 'डबल टेन नेशनल डे' की 115वीं वर्षगांठ के आयोजन के साथ आयोजित किया गया था। सम्मेलन में पांच पैनल सत्र हुए, जिनमें 20 से अधिक विद्वानों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
चीन के नए कानून को लेकर उठे सवाल
विदेशों में सक्रिय चीनी लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने चीन के नए जातीय एकता संबंधी कानून पर आपत्ति जताई है।इन संगठनों का आरोप है कि कानून के माध्यम से बीजिंग अपनी आत्मसातीकरण संबंधी नीतियों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।आत्मसातीकरण का आशय ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें किसी अल्पसंख्यक समुदाय की विशिष्ट सांस्कृतिक या सामाजिक पहचान पर बहुसंख्यक संस्कृति के अनुरूप ढलने का दबाव पड़ सकता है।आलोचकों का कहना है कि चीन के नए कानून से जातीय अल्पसंख्यक समुदायों की भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ने की आशंका है।हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में कानून की सभी धाराओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इसके वास्तविक कानूनी प्रभावों का मूल्यांकन संबंधित प्रावधानों के आधार पर ही किया जा सकता है।
न्यूयॉर्क के फ्लशिंग में आयोजित हुआ सम्मेलन
सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए न्यूयॉर्क के फ्लशिंग में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में विदेशों में रहने वाले चीनी लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता, विद्वान और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।आयोजकों ने चीन के नए कानून और जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े सवालों को चर्चा का विषय बनाया।फ्लशिंग में आयोजित इस सम्मेलन के माध्यम से प्रतिभागियों ने नए कानून को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।हालांकि, कार्यक्रम में पारित किसी औपचारिक प्रस्ताव या भविष्य की संयुक्त कार्ययोजना का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
तीन संगठनों ने मिलकर किया आयोजन
इस सम्मेलन का आयोजन तीन संगठनों ने संयुक्त रूप से किया।इनमें 'बीजिंग स्प्रिंग' पत्रिका, 'चाइनीज अलायंस फॉर डेमोक्रेसी' और 'चाइना डेमोक्रेसी पार्टी' की कार्यकारी समिति शामिल थीं।इन संगठनों ने चीन के नए कानून पर चर्चा करने के लिए विद्वानों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया।कार्यक्रम में विभिन्न पृष्ठभूमि के वक्ताओं की मौजूदगी रही।सम्मेलन का प्रमुख विषय जातीय अल्पसंख्यकों की पहचान और उनके अधिकारों को लेकर व्यक्त की जा रही चिंताएं थीं।
पांच पैनल सत्रों में हुई चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में कुल पांच पैनल सत्र आयोजित किए गए।इन सत्रों में 20 से अधिक विद्वानों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।प्रतिभागियों ने चीन के नए जातीय एकता कानून को लेकर उठ रहे सवालों पर विचार रखे।सम्मेलन में जातीय पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई।हालांकि, पांचों पैनल सत्रों के अलग-अलग विषयों और प्रत्येक वक्ता के विस्तृत संबोधन की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
चेन पोकोंग और गाओ गुआंगजुन हुए शामिल
सम्मेलन में शामिल प्रमुख वक्ताओं में टिप्पणीकार चेन पोकोंग और वकील गाओ गुआंगजुन का नाम सामने आया है।दोनों ने अन्य विद्वानों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।सम्मेलन में तिब्बत-चीन मैत्री समूह के अध्यक्ष ज़्यू वेई भी शामिल हुए।इन वक्ताओं की भागीदारी ने चीन के नए कानून को लेकर आयोजित चर्चा में विभिन्न संगठनों और विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन वक्ताओं के व्यक्तिगत भाषणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।इसलिए उनके नाम से किसी विशेष टिप्पणी या आरोप को जोड़ना उचित नहीं होगा।
तिब्बत के प्रतिनिधि ने भी लिया हिस्सा
कार्यक्रम में वाशिंगटन डीसी स्थित 'ऑफिस ऑफ तिब्बत' के चीनी संपर्क अधिकारी त्सुल्ट्रिम ग्यात्सो भी शामिल हुए।उनकी उपस्थिति के साथ सम्मेलन में तिब्बत से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी भी रही।तिब्बती पहचान, संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित प्रश्न चीन की जातीय नीतियों पर होने वाली चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।नए कानून को लेकर आलोचकों की चिंताओं में सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों के संरक्षण का मुद्दा भी शामिल है।हालांकि, त्सुल्ट्रिम ग्यात्सो ने सम्मेलन में क्या विशिष्ट टिप्पणियां कीं, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
ताइवान के राष्ट्रीय दिवस के आयोजन के साथ सम्मेलन
यह सम्मेलन ताइवान के 'डबल टेन नेशनल डे' की 115वीं वर्षगांठ के आयोजन के साथ आयोजित किया गया।डबल टेन दिवस हर वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह 1911 की वुचांग क्रांति की शुरुआत की स्मृति से जुड़ा है।इसी अवसर पर न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में चीन के नए कानून को लेकर चर्चा की गई।हालांकि, ताइवान के राष्ट्रीय दिवस से जुड़े समारोह और जातीय एकता कानून पर आयोजित सम्मेलन की अलग-अलग गतिविधियों का विस्तृत कार्यक्रम उपलब्ध नहीं है।
सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों पर चिंता
चीन के नए कानून का विरोध करने वाले संगठनों ने आरोप लगाया है कि इसके जरिए जातीय अल्पसंख्यकों की अलग पहचान प्रभावित हो सकती है।उनकी चिंताओं में सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों का संरक्षण शामिल है।आलोचकों का मानना है कि किसी भी जातीय समुदाय की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए उसकी विशिष्ट पहचान का सम्मान आवश्यक है।हालांकि, कानून के वास्तविक प्रावधानों और उनके संभावित प्रभावों को लेकर विस्तृत कानूनी विश्लेषण इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।इसके अलावा, सम्मेलन में उठाए गए आरोपों पर चीनी सरकार की कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
नए कानून पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा
न्यूयॉर्क में आयोजित इस सम्मेलन ने चीन के नए जातीय एकता कानून को लेकर विदेशों में सक्रिय लोकतंत्र समर्थक संगठनों की चिंताओं को सामने रखा है।कार्यक्रम में पांच पैनल सत्रों के दौरान 20 से अधिक विद्वानों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।आयोजकों और प्रतिभागियों ने कानून को जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।फिलहाल सम्मेलन से सामने आए आरोप और चिंताएं संबंधित संगठनों तथा कार्यकर्ताओं के विचार हैं। कानून के प्रभावों पर किसी अंतिम निष्कर्ष के लिए उसके प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन का अध्ययन आवश्यक होगा।
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