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तिब्बत मुद्दे पर चीन का भारत को संदेश, CTA की गतिविधियों से दूरी बनाने की अपील

Kavita2
25 May 2026 10:11 AM IST
तिब्बत मुद्दे पर चीन का भारत को संदेश, CTA की गतिविधियों से दूरी बनाने की अपील
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China चीन : तिब्बत से जुड़े मुद्दे पर एक बार फिर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के नए राजनीतिक नेता के शपथ ग्रहण से पहले चीन ने रविवार को भारत से अपील की है कि वह “तिब्बती आज़ादी” से जुड़ी गतिविधियों के लिए किसी भी प्रकार का मंच उपलब्ध कराने से बचें और दलाई लामा के उत्तराधिकारी (पुनर्जन्म) से संबंधित मामलों में हस्तक्षेप न करे।

CTA की ओर से 27 मई को धर्मशाला में नए सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाना है। संगठन के अनुसार, इस कार्यक्रम में 14वें दलाई लामा के भी शामिल होने की संभावना है। इसी कार्यक्रम को लेकर चीन ने अपनी आपत्ति जताई है और भारत को इस संदर्भ में सावधानी बरतने की सलाह दी है।

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि तथाकथित CTA को किसी भी संप्रभु देश द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके नेतृत्व के पास न तो तिब्बती लोगों का प्रतिनिधित्व करने की वैधता है और न ही पुनर्जन्म प्रक्रिया पर कोई दावा करने का अधिकार है।

यू जिंग ने आगे कहा कि भारत ने तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट की है और कुछ प्रतिबद्धताएं भी जताई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इन वादों का पालन करेगा और किसी भी ऐसी गतिविधि को मंच नहीं देगा जो “तिब्बती स्वतंत्रता” का समर्थन करती हो। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत को दलाई लामा के पुनर्जन्म से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की भागीदारी से बचना चाहिए।

चीनी प्रवक्ता ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस तरह का रुख भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता और बेहतर विकास में सकारात्मक योगदान देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना दोनों देशों के हित में है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब धर्मशाला में CTA के नए नेतृत्व का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने जा रहा है। CTA लंबे समय से तिब्बती समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधि संगठन के रूप में कार्य कर रहा है और दलाई लामा इसके सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता माने जाते हैं।

इस घटनाक्रम को भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि तिब्बत मुद्दा दोनों देशों के बीच लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से क्षेत्रीय कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है, हालांकि भारत की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

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