
China का चंद्र मिशन: ‘मून ब्रिक्स’ तकनीक से चाँद पर घर बनाने की योजना
चीन ने पिछले दशक में तकनीकी प्रगति के मामले में दुनिया को चौंका दिया है। अब मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने चंद्र मिट्टी (रेगोलिथ) से मजबूत ईंट बनाने की तकनीक विकसित की है। इन ईंटों का इस्तेमाल चाँद पर घर और शोध केंद्र बनाने में किया जाएगा। चीन का लक्ष्य 2035 तक चंद्र बस्तियाँ स्थापित करना है।
‘मून ब्रिक्स’ तकनीक क्या है?
चीन के वैज्ञानिकों ने एक मशीन बनाई है जो चंद्र सतह से रेगोलिथ इकट्ठा कर उसे विशेष कक्षों में उच्च तापमान पर गरम करके ईंट बनाती है। यह तकनीक अंतरिक्ष में निर्माण सामग्री को पृथ्वी से लाने की लागत को कम करती है, क्योंकि पृथ्वी से सामग्री लाने में प्रति किलो करोड़ों रुपए खर्च हो सकते हैं।
तकनीक कैसे काम करती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया पृथ्वी पर मिट्टी से ईंट बनाने जैसी है। मशीन सूरज की रोशनी को 3000 गुना बढ़ाकर रेगोलिथ को 1300 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करती है। इस तापमान पर मिट्टी पिघलकर टिकाऊ ईंट में बदल जाती है। प्रारंभ में इसे पृथ्वी पर ज्वालामुखी राख पर परीक्षण किया गया था।
ईंटों का परीक्षण कहाँ होगा?
चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर तीन साल तक ईंटों का रेडिएशन और तापमान सहन क्षमता परीक्षण किया जाएगा।
चीन की चंद्र योजना
2026: Chang-E-7 मिशन, चंद्र दक्षिण ध्रुव पर पानी खोजने के लिए
2028: Chang-E-8 मिशन, चंद्र आधार के लिए मून ब्रिक्स तकनीक ले जाएगा
2030: मानव मिशन
2035: स्थायी शोध केंद्र और चंद्र कॉलोनी
चीन और रूस मिलकर चाँद पर परमाणु ऊर्जा केंद्र भी बनाएंगे, जो अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS) को ऊर्जा देगा। यह परियोजना 2036 तक पूरी होने की संभावना है।





