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Taipei ताइपे: चीन नवंबर में होने वाले ताइवान के ‘नाइन-इन-वन’ स्थानीय चुनावों में दखल देने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह ताइवान के गवर्नमेंट सर्विस नेटवर्क (जीएसएन) पर साइबर हमले कर सकता है। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो की एक रिपोर्ट के हवाले से दी। ताइवान के अखबार ताइपे टाइम्स ने बताया कि यह रिपोर्ट पिछले हफ्ते फॉरेन अफेयर्स और नेशनल डिफेंस कमेटी में होने वाली ब्रीफिंग से पहले संसद (लेजिस्लेटिव युआन) में जमा की गई थी।
रिपोर्ट में चीन की “कॉग्निटिव वॉरफेयर” यानी लोगों के सोच और राय को प्रभावित करने की कोशिशों का जिक्र है। ब्यूरो के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने करीब 13,000 संदिग्ध इंटरनेट अकाउंट और 8,60,000 विवादित संदेशों की पहचान की है। इन संदेशों में ज्यादातर विदेशी मामलों, रक्षा और आर्थिक मुद्दों पर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाई गई। कहा गया कि इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बनाया गया और चीनी सरकारी मीडिया, इंटरनेट ट्रोल्स, संदिग्ध अकाउंट्स और कंटेंट फार्म्स के जरिए फैलाया गया।
ब्यूरो ने बताया कि 2026 की पहली तिमाही में जीएसएन पर 17.3 करोड़ (173.28 मिलियन) से ज्यादा बार साइबर हमले हुए। माना जा रहा है कि ये हमले चुनावों में हस्तक्षेप की कोशिश का हिस्सा हो सकते हैं। इनका मकसद जानकारी जुटाना, निगरानी करना और डेटा चोरी करना हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल के अंत में होने वाले चुनावों को प्रभावित करने के लिए चीन 'हाइब्रिड' तरीका अपनाएगा। इसमें एआई से बने डीपफेक वीडियो फैलाना, फर्जी सर्वे जारी करना और गैरकानूनी सट्टेबाजी नेटवर्क खड़ा करना शामिल हो सकता है।
इसके अलावा, चीन लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए टूर ग्रुप्स को चीन बुलाकर उनका खर्च उठा सकता है और उन इलाकों से कृषि उत्पाद खरीद सकता है जो उसके समर्थक माने जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में चीनी सैन्य विमान 420 से ज्यादा बार ताइवान के एयरस्पेस में घुसे। ये गतिविधियां चीनी नौसेना के साथ मिलकर की गईं, जिनमें दस 'जॉइंट कॉम्बैट रेडीनेस पेट्रोल' शामिल थे। इनका मकसद ताइवान के खिलाफ अपनी सैन्य तैयारी को परखना था।
साथ ही, रिपोर्ट में बताया गया कि चीनी कोस्ट गार्ड के जहाज 2025 में 44 बार और 2026 की पहली तिमाही में 12 बार किनमेन काउंटी के प्रतिबंधित पानी में घुसे। इन ऑपरेशनों के दौरान जहाजों ने जानबूझकर अपना ट्रैकिंग सिस्टम (एआईएस) बंद कर दिया, ताकि ताइवान की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को परखा जा सके।
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