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Beijing बीजिंग। 14वीं चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) के चौथे सत्र में 12 मार्च को मतदान से 'चीन लोक गणराज्य पारिस्थितिक और पर्यावरण संहिता' को अपनाया गया। यह चीन में "नागरिक संहिता" के बाद दूसरा कानून है जिसे "संहिता" का नाम दिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि देश में पारिस्थितिक और पर्यावरण संरक्षण 'संहिताकरण' युग में प्रवेश कर चुका है।
जानकारी के अनुसार, "पारिस्थितिक और पर्यावरण संहिता" में 5 भाग और 1,242 अनुच्छेद हैं, ये हैं:सामान्य प्रावधान, प्रदूषण रोकथाम, पारिस्थितिक संरक्षण, हरित एवं कम कार्बन विकास, कानूनी दायित्व और पूरक प्रावधान।
'पारिस्थितिक और पर्यावरण संहिता' का संकलन कॉमरेड शी चिनफिंग के नेतृत्व में सीपीसी केंद्रीय समिति द्वारा शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और विधायी कार्य है। यह संहिता शी चिनफिंग के नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद के विचारों, विशेष रूप से पारिस्थितिक सभ्यता पर उनके विचारों से प्रेरित है, इसमें चीनी विशेषताएं समाहित हैं। समय की विशेषताओं और जनता की इच्छा को प्रतिबिंबित करने वाली यह संहिता व्यवस्थित, मानकीकृत और समन्वित है।
अप्रैल 2025 में, 'पारिस्थितिक और पर्यावरण संहिता' का मसौदा प्रथम समीक्षा के लिए 14वीं एनपीसी की स्थायी समिति के 15वें सत्र में प्रस्तुत किया गया था। बाद में, अलग-अलग और समग्र समीक्षाओं के बाद, इस वर्ष 5 मार्च को इस संहिता का मसौदा समीक्षा के लिए 14वीं एनपीसी के चौथे सत्र में प्रस्तुत किया गया।
इस वर्ष "दो सत्र" के दौरान, एनपीसी प्रतिनिधियों और सीपीपीसीसी सदस्यों ने इस संहिता के मसौदे की सावधानीपूर्वक समीक्षा की और उत्साहपूर्वक चर्चा की। विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों और संबंधित पक्षों की राय के आधार पर, 200 से अधिक संशोधन किए गए, जिनमें 100 से अधिक महत्वपूर्ण संशोधन शामिल हैं। बता दें कि 'पारिस्थितिक और पर्यावरण संहिता' 15 अगस्त, 2026 से प्रभावी होगी। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण कानून सहित दस कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा।
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