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CHAINA चाइना : शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के थ्येनचिन शिखर सम्मेलन के आयोजन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के सुअवसर पर, शनिवार को 'सभ्यताओं के बीच आपसी सीख, हाथ में हाथ डालकर चलें' विषय पर चीन-भारत युवा संवाद चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित किया गया। चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के एशिया अफ्रीका केंद्र और पेइचिंग विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा कॉलेज द्वारा आयोजित इस संवाद में चीनी और भारतीय शिक्षक-छात्र, युवा विद्वान, मीडिया कर्मी, युवा उद्यमिता, इंटरनेट सेलिब्रिटी समेत लगभग 100 लोगों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य चीन और भारत के युवाओं के लिए आपसी संवाद और संचार का मंच बनाना है।
पेइचिंग विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा कॉलेज की सीपीसी समिति की सचिव ली शूचिंग ने भाषण देते हुए कहा कि युवा राष्ट्र का भविष्य होने के साथ-साथ चीन-भारत मैत्रीपूर्ण संबंधों के उत्तराधिकारी और प्रवर्तक भी हैं। आज के वैश्वीकृत विश्व में, युवाओं का आदान-प्रदान और सहयोग चीन-भारत संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करेगा और विश्व शांति एवं विकास में बुद्धि और बल का योगदान देगा। उन्हें आशा है कि 'सभ्यताओं के बीच आपसी सीख', 'हाथ में हाथ डालकर चलना' और 'युवा संवाद' विषयक आदान-प्रदान गतिविधियां चीन और भारत के बीच सभ्यतागत संवाद की मशाल को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएंगी।
वहीं, सीएमजी एशिया अफ्रीका केंद्र की उप निदेशक चांग हुई ने कहा कि सभ्यता स्वयं एक संवाद है, जो समय और स्थान से परे है। बुद्ध की पूर्व की ओर यात्रा और पश्चिम की ओर ह्वेन त्सांग के पदचिह्न, भारत में 'शून्य' अंक के आविष्कार ने आधुनिक गणित की नींव रखी, और चीन के कागज आविष्कार ने मानव सभ्यता के प्रसार को गति दी। दो प्राचीन सभ्यताओं के रूप में, चीन और भारत का ज्ञान आपसी सीख के माध्यम से पुनर्जीवित होता रहता है, जिससे विश्व और मानवता को लाभ होता है। उन्हें आशा है कि संवाद के इस मंच के माध्यम से, चीन और भारत के युवा सभ्यता की मशाल को आगे बढ़ाने, समझ के पुल बनाने, आदान-प्रदान और संवाद के माध्यम से आम सहमति बनाने और सभ्यताओं के बीच आपसी सीख में मिलकर काम करने के अनूठे मिशन को आगे बढ़ाएंगे।
इस संवाद में, चीन में हिंदी पढ़ाने वाले भारतीय प्रोफेसर, चीनी मीडिया के लिए कार्यरत भारतीय पत्रकार, चीन में प्रमुख भारतीय ब्लॉगर, चीन में भारतीय रेस्टोरेंट मालिक सहित कई भारतीय युवा प्रतिनिधियों ने चीनी विद्वानों, मीडियाकर्मियों और थिंक टैंक विशेषज्ञों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सभ्यताओं के बीच संवाद और युवा सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की। उपस्थित लोगों ने चीन-भारत द्विपक्षीय संबंधों और एक-दूसरे के देश में अपने व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में कहानियां साझा कीं। उन्होंने संयुक्त रूप से दोनों देशों के युवाओं से आदान-प्रदान को मजबूत करने, गलतफहमियों को दूर करने, समझ को व्यापक बनाने, मित्रता को बढ़ाने और चीन-भारत संबंधों के विकास में योगदान देने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
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