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चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने का फैसला किया, सोयाबीन को राहत सूची से रखा बाहर

Kavita2
30 Sept 2026 3:13 PM IST
चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने का फैसला किया, सोयाबीन को राहत सूची से रखा बाहर
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बीजिंग। चीन ने अमेरिका से आयात होने वाले कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने का फैसला किया है। यह कदम चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की हालिया अमेरिकी यात्रा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई व्यापार वार्ता के बाद उठाया गया है। हालांकि इस राहत में अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण कृषि निर्यात उत्पादों में शामिल सोयाबीन को जगह नहीं मिली है। अमेरिकी सोयाबीन पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क फिलहाल बना रहेगा।

नई व्यवस्था के तहत चीन ने मक्का, गेहूं, ज्वार, वनस्पति तेल, सोयाबीन तेल, सोयामील, मांस और डेयरी उत्पादों समेत कई अमेरिकी कृषि वस्तुओं पर टैरिफ में राहत देने की तैयारी की है। इन उत्पादों के बड़े हिस्से पर अतिरिक्त शुल्क हटाकर उन्हें सामान्य ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ दरों के तहत लाने की योजना है।

यह फैसला अमेरिका और चीन की ओर से तैयार की गई ‘30-फॉर-30’ उत्पाद सूची का हिस्सा है। दोनों देशों ने लगभग 30-30 अरब डॉलर मूल्य के गैर-संवेदनशील उत्पादों की सूची तैयार की है, जिन पर भविष्य में बेहतर टैरिफ व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाएगा। इस तरह दोनों तरफ से कुल लगभग 60 अरब डॉलर के व्यापार को संभावित राहत के दायरे में लाया गया है।

अमेरिका की सूची में चीन से आने वाले घरेलू उपयोग के सामान, खिलौने और अन्य गैर-संवेदनशील उत्पाद शामिल हैं। दूसरी ओर चीन की सूची में अमेरिकी कृषि उत्पादों के साथ कुछ अन्य वस्तुएं भी शामिल की गई हैं। दोनों देशों का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद व्यापारिक संबंधों को स्थिर करना और बाजार तक पहुंच बढ़ाना है।

सबसे ज्यादा चर्चा सोयाबीन को सूची से बाहर रखे जाने की हो रही है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन आयातक है और अमेरिका के लिए भी यह कृषि व्यापार का अहम उत्पाद है। इसके बावजूद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन को नई टैरिफ राहत सूची में शामिल नहीं किया है।

अमेरिकी सोयाबीन पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क बने रहने से निजी चीनी प्रोसेसर के लिए अमेरिकी सोयाबीन खरीदना महंगा पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा शुल्क के कारण अमेरिकी सोयाबीन की कीमत प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाती, खासकर तब जब ब्राजील और अर्जेंटीना से वैकल्पिक आपूर्ति उपलब्ध हो।

चीन में सोयाबीन की मांग भी फिलहाल दबाव में बताई जा रही है। पशु आहार की कमजोर मांग, प्रोसेसिंग मार्जिन में कमी और ऊंचे स्टॉक के कारण अमेरिकी सोयाबीन के लिए बाजार की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं। चीन की क्रशिंग इकाइयों में सोयाबीन का भंडार कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा हुआ है।

हालांकि चीन की सरकारी कंपनियों ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद जारी रखी है। चीनी सरकारी कंपनियां सिनोग्रेन और COFCO पहले ही 12 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक अमेरिकी सोयाबीन खरीद चुकी हैं। अमेरिका की ओर से दावा किया गया है कि चीन ने 2028 तक हर वर्ष लगभग 25 मिलियन मीट्रिक टन अमेरिकी सोयाबीन खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है, हालांकि चीन ने इस लक्ष्य की सार्वजनिक रूप से अलग पुष्टि नहीं की है।

सोयाबीन को राहत सूची से बाहर रखने को दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता में एक महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है। कृषि व्यापार अमेरिका-चीन संबंधों में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। अमेरिका के कई कृषि राज्यों की अर्थव्यवस्था सोयाबीन निर्यात पर निर्भर है, जबकि चीन के लिए यह पशु आहार और खाद्य तेल उद्योग का महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

हालिया समझ के तहत दोनों देशों ने व्यापारिक टकराव को कम करने के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन सभी विवादित मुद्दे हल नहीं हुए हैं। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, दुर्लभ खनिज और तकनीकी निर्यात नियंत्रण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को मौजूदा राहत व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

दोनों देशों ने मौजूदा व्यापारिक संघर्ष विराम को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई है। इससे कंपनियों और आयातकों को कुछ समय के लिए स्थिरता मिलने की उम्मीद है। हालांकि टैरिफ कटौती कब से पूरी तरह लागू होगी, इस पर सभी उत्पादों के लिए स्पष्ट समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।

‘30-फॉर-30’ व्यवस्था को अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका फोकस ऐसे गैर-संवेदनशील उत्पादों पर है जिन पर दोनों देश आसानी से रियायत दे सकते हैं। रणनीतिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील उत्पादों पर अभी भी अलग बातचीत जारी रहेगी।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की ओर से कहा गया है कि इस व्यवस्था से चीन में लगभग 30 प्रतिशत अमेरिकी निर्यात के लिए बाजार पहुंच बेहतर हो सकती है। कृषि उत्पाद, चिकित्सा उपकरण और अन्य वस्तुएं इसका हिस्सा हैं।

चीन के लिए भी यह फैसला अमेरिकी बाजार में अपने उपभोक्ता उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच हासिल करने का माध्यम है। दोनों देश लंबे व्यापार संघर्ष के बाद अब ऐसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं जहां राजनीतिक जोखिम कम है।

फिलहाल अमेरिकी किसानों की नजर खास तौर पर सोयाबीन पर बनी हुई है। अन्य कृषि उत्पादों को टैरिफ राहत मिलने के बावजूद सोयाबीन पर अतिरिक्त शुल्क जारी रहने से अमेरिकी उत्पादकों को तत्काल बड़ा लाभ मिलने की संभावना सीमित है।

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या चीन सोयाबीन को भी भविष्य की किसी टैरिफ राहत सूची में शामिल करता है या इसे व्यापार वार्ता में एक अलग रणनीतिक मुद्दे के रूप में बनाए रखता है। अभी के लिए मक्का, गेहूं, मांस और डेयरी समेत कई अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए चीन का बाजार कुछ आसान हुआ है, लेकिन सबसे बड़े कृषि व्यापार उत्पाद सोयाबीन पर पुरानी बाधा बनी हुई है।

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