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सीमा पर 2000 Km लंबी दीवार बना रहा चीन, दहशत में स्‍थानीय लोग

Neha Dani
17 Dec 2020 9:24 AM GMT
सीमा पर 2000 Km लंबी दीवार बना रहा चीन, दहशत में स्‍थानीय लोग
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चीन (China) लगातार दक्षिण एशिया में दादागिरी के जरिए अपनी बादशाहत कायम रखना चाहता है.

चीन (China) लगातार दक्षिण एशिया में दादागिरी के जरिए अपनी बादशाहत कायम रखना चाहता है. इसी क्रम में चीन ने कंटीले तारों की मदद से म्‍यांमार (Myanmar) की सीमा पर 2000 किलोमीटर लंबी दीवार (2000 Km Southern Great Wall) का निर्माण शुरू किया है. म्यांमार की सेना ने इस दीवार का विरोध भी किया है. उधर अमेरिका के एक शीर्ष थिंकटैंक ने कहा है कि दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती भूमिका का क्षेत्र की राजनीति, अर्थशास्त्र और सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है और आने वाले दशकों में क्षेत्र में संघर्ष एवं उथल पुथल काफी बढ़ सकती है.

रेडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक म्‍यांमार से लगती चीन की सीमा पर करीब 2000 किमी लंबी यह दीवार बनाई जा रही है. ग्लोबल टाइम्स का दावा है कि इस दीवार को बनाने का मकसद देश के अंदर म्‍यांमार से अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाना है. चीन के दक्षिणी-पश्चिमी यून्‍नान प्रांत में 6 से 9 मीटर ऊंची कंटीले तारों से इस दीवार को बनाए जाने का काम शुरू हो गया है. हालांकि वेस्ट मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की इस नई महान दीवार का असल मकसद असंतुष्‍टों को चीन से फरार होने से रोकना है।

म्‍यांमार ने किया विरोध
बता दें कि इस दीवार का म्‍यामांर की सेना ने विरोध किया है. म्‍यामांर की सेना ने चीनी अधिकारियों को एक पत्र लिखकर तार लगाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है. म्‍यामांर के अखबार इर्रावडी की खबर के मुताबिक देश की सेना के प्रवक्‍ता मेजर जनरल जॉ मिन तुन ने कहा कि चीन ने पोस्‍ट संख्‍या BP-125 के पास रविवार को बाड़ लगाने का काम शुरू किया. मेजर तुन ने कहा, 'स्‍थानीय बटैलियन ने चीनी पक्ष को आपत्ति पत्र भेजा है. हमने वर्ष 1961 में हुई सीमा संधि के आधार पर यह आपत्ति जताई है.' इस संधि के प्रावधानों में कहा गया है कि सीमांकन के 10 मीटर के अंदर किसी भी ढांचे का निर्माण नहीं हो सकता है. चीन ने दावा किया था कि अवैध रूप से लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए वह बाड़ का निर्माण करा रहा है.
अपनी इज्जत बचाने के लिए बना रहा !
रेडियो फ्री एशिया ने कहा कि 'दक्षिणी महान दीवार' के कोड नेम से इस पूरी परियोजना को चलाया जा रहा है. इस परियोजना का पहला चरण पूरा हो गया है और 650 किमी के इलाके में बाड़ लगाने का काम पूरा हो गया है. चीन की योजना है कि साल 2022 तक म्‍यांमार से लगती 2000 किमी सीमा पर इस हाईटेक दीवार को बनाने का काम पूरा कर लिया जाय. इस बाड़ में बिजली का करंट दौड़ता रहता है और इंफ्रारेड सेंसर के साथ शक्तिशाली कैमरे लगाए गए हैं. विशेषज्ञों इस दीवार को बनाने के पीछे पूरी प्‍लानिंग छिपी हुई है. इस बाड़ के बन जाने के बाद चीनी असंतुष्‍ट आसानी से म्‍यांमार या वियतनाम नहीं जा पाएंगे. उन्‍होंने कहा कि चीन नहीं चाहता है कि उसके विरोधी देश छोड़कर इन देशों में छिप जाएं.

चीन की बढ़ती भूमिका से क्षेत्र में बढ़ेगा संघर्ष
अमेरिकी थिंकटैंक 'यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' ने बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा कि चीन की भागीदारी से क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना एक सफल नीति बनाने और अमेरिका के हितों एवं मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए अहम होगा. रिपोर्ट एक द्विदलीय समूह द्वारा तैयार की गई है, जिसमें वरिष्ठ विशेषज्ञ, पूर्व नीति निर्माता और सेवानिवृत्त राजनयिक आदि शामिल हैं. रिपोर्ट 'चायनाज इन्फ्लुएंस ऑन कॉन्फ्लिक्ट डायनामिक्स इन साउथ एशिया स्टेट्स' में कहा गया है, 'क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी से दक्षिण एशिया में स्थिति पहले ही बदलनी शुरू हो गई है. यह एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, जहां अमेरिका-चीन और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता हिमालय की ऊंचाई से लेकर हिंद महासागर की गहराई तक फैली है.'
यह पाया गया कि अमेरिका और चीन दोनों ही दक्षिण एशिया को महत्वपूर्ण मानते हैं, 'हालांकि यह क्षेत्र दोनों की ही शीर्ष भू-राजनीतिक प्राथमिकता नहीं है.' थिंकटैंक ने रिपोर्ट में कहा कि भारत-पाकिस्तान विवाद में चीन ने तटस्थ रुख अपनाने की बजाय अधिकतर पाकिस्तान का ही साथ दिया है, क्योंकि पाकिस्तान को समर्थन देने से एशिया में भारत की ताकत कम करने में मदद मिलती है. उसने कहा, 'खासकर पिछले साल, चीन ने कश्मीर के मामले में पाकिस्तान के लिए अपना समर्थन दोगुना कर दिया.' रिपोर्ट के अनुसार चीन-भारत सीमावर्ती इलाके आगे भी चर्चा का विषय बने रहेंगे. चीन और भारत के संबंध और अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे और एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां, पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के लिए संघर्ष करेंगी.


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