
वर्ल्ड | पिछले 50 सालों में रमज़ान के दौरान बदलावों की जो कहानी है, वह तकनीकी विकास और सामाजिक परिवर्तनों की गहरी छाप छोड़ती है। पहले जहां रोज़ा खोलने और सहरी की जानकारी पाने के लिए तोप के गोले का सहारा लिया जाता था, वहीं अब मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने यह कार्य बेहद आसान बना दिया है।
पुराने समय में, खासकर एशियाई देशों में, रोज़ा खोलने के समय की सूचना देने के लिए तोप के गोले की आवाज़ का इस्तेमाल होता था। यह एक पारंपरिक तरीका था जिससे लोग सही समय पर रोज़ा खोलते थे और सहरी का समय जानते थे। लेकिन आजकल यह सब बदल चुका है।
आजकल, मोबाइल ऐप्स और डिजिटल घड़ियों के माध्यम से लोग रोज़ा खोलने और सहरी की सही टाइमिंग आसानी से जान सकते हैं। इन ऐप्स में न सिर्फ समय दिखाया जाता है, बल्कि इसमें इबादत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी और दुआओं का भी ख्याल रखा जाता है। साथ ही, रमज़ान के महीने में शॉपिंग की परंपरा भी अब ऑनलाइन हो गई है।
ऑनलाइन शॉपिंग के चलते, बाजारों में जाने की ज़रूरत काफी कम हो गई है। अब लोग घर बैठे ही रमज़ान के लिए जरूरी सामान खरीद सकते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया और वेबसाइट्स पर धार्मिक कंटेंट की भरमार है, जो न सिर्फ जानकारी देने का काम करती हैं, बल्कि इबादत के दौरान मार्गदर्शन भी करती हैं।
धर्म के दृष्टिकोण से भी इस्लामिक ऐप्स ने लोगों को अपनी धार्मिक गतिविधियों में मदद करने के लिए कई उपाय दिए हैं। इबादत के समय, व्रत के नियमों, कुरान की तिलावत, दुआओं और रमज़ान के महत्व को समझने के लिए ये ऐप्स एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।
रमज़ान के इस डिजिटल बदलाव ने केवल व्यावहारिकताओं में ही बदलाव नहीं किया, बल्कि इसने धार्मिक जीवन को भी एक नया रूप दिया है। जहां पहले लोग मस्जिदों और इमामों से मार्गदर्शन लेते थे, अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से वह मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं।





