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भारत के साथ रक्षा साझेदारी मजबूत करेगा ब्राजील, 41 सदस्यीय सैन्य दल पहुंचा भारत
Ratna Netam
2 Nov 2026 9:33 PM IST

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नई दिल्ली। भारत और ब्राजील के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। ब्राजील की सेना के कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज का 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर पहुंचा है। इस प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली और आगरा में विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों का भ्रमण किया और भारतीय सेना की क्षमताओं, सैन्य व्यवस्थाओं तथा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी हासिल की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर संवाद को बढ़ावा देना, सैन्य सहयोग मजबूत करना और आपसी समझ विकसित करना है।भारतीय सेना ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस यात्रा की जानकारी साझा की। सेना के अनुसार, ब्राजीलियाई प्रतिनिधिमंडल ने विदेशी अध्ययन यात्रा के तहत भारत के प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठानों और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधियों को भारत की सैन्य क्षमताओं, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझने का अवसर मिला। भारतीय सेना ने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला है और भारत-ब्राजील रक्षा साझेदारी को नई मजबूती मिली है।
दिल्ली और आगरा में रक्षा प्रतिष्ठानों का दौरा
ब्राजीलियाई सैन्य प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान नई दिल्ली और आगरा प्रमुख केंद्र रहे। प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा प्रतिष्ठानों का भ्रमण करके भारतीय सेना की कार्यप्रणाली और सैन्य क्षमताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।इसके अतिरिक्त प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों का भी दौरा किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि भारत की सभ्यता, परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता से भी ब्राजीलियाई अधिकारियों को परिचित कराना था।भारतीय सेना के अनुसार, इस तरह की यात्राएं दोनों देशों के सैनिकों और अधिकारियों के बीच विश्वास तथा सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।हालांकि, सेना ने अपने सार्वजनिक बयान में उन सभी रक्षा प्रतिष्ठानों के नाम नहीं बताए, जिनका प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया।
सैन्य अधिकारियों के बीच पेशेवर संवाद पर जोर
भारत और ब्राजील के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने में इस प्रकार के अध्ययन दौरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों देशों के अधिकारी एक-दूसरे की सैन्य व्यवस्थाओं, प्रशिक्षण पद्धतियों और संस्थागत कार्यप्रणाली को समझने का अवसर प्राप्त करते हैं।विदेशी अध्ययन यात्राएं सैन्य शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इनके माध्यम से अधिकारियों को विभिन्न देशों की रक्षा नीतियों, सुरक्षा चुनौतियों और सैन्य संगठन के बारे में जानकारी मिलती है।ब्राजीलियाई प्रतिनिधिमंडल की वर्तमान यात्रा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे दोनों देशों के सैन्य शिक्षण संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ने और भविष्य में सहयोग की नई संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।
2003 में हुआ था रक्षा सहयोग समझौता
भारत और ब्राजील के बीच रक्षा संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है। दोनों देशों ने वर्ष 2003 में रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे 2006 में अनुमोदित किया गया।इस समझौते के तहत संयुक्त रक्षा समिति का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को संस्थागत आधार प्रदान करना था।इस समिति की आठवीं बैठक 29 और 30 जुलाई 2025 को ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में आयोजित हुई थी। बैठक के माध्यम से दोनों देशों ने रक्षा संबंधी विषयों पर बातचीत जारी रखी।इसके अलावा मार्च 2024 में नई दिल्ली में भारत-ब्राजील 2+2 राजनीतिक-सैन्य संवाद की शुरुआत हुई थी। इसी महीने रक्षा औद्योगिक सहयोग से संबंधित द्विपक्षीय फोकस ग्रुप की पहली बैठक भी आयोजित की गई थी।
रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं
भारत और ब्राजील के बीच रक्षा संबंध अब सैन्य प्रशिक्षण और अधिकारियों की यात्राओं से आगे बढ़कर रक्षा उत्पादन तथा तकनीकी सहयोग तक विस्तार कर रहे हैं।भारत अपनी स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली और अन्य भारतीय रक्षा उपकरण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं।अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ब्राजीलियाई सैन्य अधिकारियों की यात्रा के व्यापक कार्यक्रम में भारतीय रक्षा उद्योग और सैन्य तकनीकों को समझने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।रिपोर्टों में ब्रह्मोस एयरोस्पेस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसे रक्षा प्रतिष्ठानों के संभावित दौरे का उल्लेख किया गया था।हालांकि, वर्तमान 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान किसी नए हथियार सौदे या रक्षा खरीद समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
नौसेना सहयोग में भी बढ़ रही साझेदारी
भारत और ब्राजील के बीच रक्षा सहयोग केवल थलसेना तक सीमित नहीं है। दोनों देशों की नौसेनाएं भी तकनीकी और संस्थागत सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।9 दिसंबर 2025 को भारतीय नौसेना, ब्राजीलियाई नौसेना और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों तथा अन्य सैन्य जहाजों के रखरखाव से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।इस समझौते का उद्देश्य तकनीकी जानकारी, रखरखाव प्रक्रियाओं और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।दिसंबर 2025 में तत्कालीन भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने ब्राजील का दौरा भी किया था। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और नौसैनिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
मोदी और लूला के बीच भी हुई थी महत्वपूर्ण बातचीत
भारत और ब्राजील के द्विपक्षीय संबंधों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों से भी मजबूती मिली है।ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फरवरी 2026 में भारत की राजकीय यात्रा की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत में रक्षा, तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल सहयोग और अन्य रणनीतिक विषय शामिल रहे।भारत और ब्राजील दोनों ब्रिक्स तथा जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के सदस्य हैं। दोनों देश वैश्विक दक्षिण के विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं।ऐसे में सैन्य प्रतिनिधिमंडलों की यात्राएं व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं।
भविष्य में और मजबूत हो सकते हैं सैन्य संबंध
ब्राजीलियाई सेना के 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का एक और उदाहरण है।इस यात्रा से सैन्य अधिकारियों को एक-दूसरे की क्षमताओं और कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला है। साथ ही, रक्षा शिक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के क्षेत्र में संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।भारतीय सेना ने इस यात्रा को दोनों देशों की बढ़ती रक्षा साझेदारी के लिए सकारात्मक कदम बताया है।आने वाले समय में भारत और ब्राजील के बीच रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक, नौसैनिक सहयोग और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में अधिक संपर्क देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी नए रक्षा समझौते या संयुक्त परियोजना के संबंध में आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही उसकी पुष्टि की जा सकेगी।
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