
ब्राजील : ब्राजील की सरकार ने एक बयान जारी कर स्वीकार किया कि पूर्व राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो के कार्यकाल के दौरान पेराग्वे की सरकार की जासूसी की गई थी। इस बयान में यह भी कहा गया कि मौजूदा राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के सत्ता में आने के बाद इसे तुरंत रोक दिया गया था।
हाल ही में एक न्यूज वेबसाइट ने आरोप लगाया था कि ब्राजील की मौजूदा सरकार पेराग्वे की जासूसी करा रही है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का माहौल बना। इसके बाद, ब्राजील सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इस मामले को खारिज किया और सफाई दी कि यह सब बोल्सोनारो के कार्यकाल के दौरान हुआ था।
ब्राजील के सरकारी अधिकारियों ने कहा, "जासूसी का यह मामला पूर्व सरकार के दौरान हुआ था, और राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के सत्ता संभालने के बाद इस प्रक्रिया को तुरंत बंद कर दिया गया।" सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रशासन इस तरह की गतिविधियों में शामिल नहीं है और यह नीति पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है।
पेराग्वे की प्रतिक्रिया
पेराग्वे ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई थी, लेकिन ब्राजील सरकार ने उन्हें विश्वास दिलाया कि इस तरह की गतिविधियां अब नहीं चल रही हैं। दोनों देशों के बीच इसके बाद कोई गंभीर तनाव नहीं पैदा हुआ है, लेकिन यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में हल्की सी दरार जरूर डाल चुका है।
लूला डा सिल्वा की स्थिति
राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने इस घटना को लेकर कहा कि उनका प्रशासन हमेशा पारदर्शिता और शांति के पक्ष में है। उन्होंने इस तरह की जासूसी गतिविधियों को नकारते हुए अपने प्रशासन के प्रति विश्वास बनाए रखने की अपील की।
भविष्य में रिश्तों पर असर
यह घटना ब्राजील और पेराग्वे के रिश्तों पर कुछ हद तक असर डाल सकती है, लेकिन दोनों देशों के बीच राजनयिक और व्यापारिक संबंध मजबूत बने हुए हैं। इस मामले के बाद, दोनों देशों के नेताओं ने आपसी विश्वास और सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है।





