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भाजपा का गोवा में अल्पसंख्यक ईसाइयों पर दांव, उतारे 12 कैंडिडेट, पार्टी में बढ़ी नाराजगी

Renuka Sahu
9 Feb 2022 2:13 AM GMT
भाजपा का गोवा में अल्पसंख्यक ईसाइयों पर दांव, उतारे 12 कैंडिडेट, पार्टी में बढ़ी नाराजगी
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फाइल फोटो 

गोवा जैसे छोटे राज्य में राजनीति और सामाजिक समीकरण अन्य राज्यों की तुलना में अलग है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। गोवा जैसे छोटे राज्य में राजनीति और सामाजिक समीकरण अन्य राज्यों की तुलना में अलग है। जहां देश के अन्य हिस्सों में भाजपा को अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं गोवा में उसे ईसाई समुदाय का भरपूर समर्थन मिल रहा है। बीते दो विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ईसाई समुदाय के जितने भी उम्मीदवार उतारे, सभी को जीत हासिल हुई है। इससे उत्साहित होकर भाजपा ने इस बार 12 ईसाई उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है।

गोवा के सामाजिक समीकरणों में लगभग 66 फीसदी हिंदू, 25 फीसदी ईसाई व आठ फीसदी मुस्लिम हैं। भाजपा को आमतौर पर हिंदूवादी पार्टी माना जाता है और देश के विभिन्न राज्यों में यह समुदाय उसका बड़ा आधार भी है, लेकिन गोवा के समीकरण कुछ अलग हैं। भाजपा को यहां पर ईसाई समुदाय का भरपूर समर्थन हासिल हुआ है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने छह ईसाई उम्मीदवार उतारे थे और सभी को जीत हासिल हुई थी। 2017 में भाजपा ने ईसाई समुदाय के सात उम्मीदवारों पर दांव लगाया और वे सभी भी जीतने में सफल रहे। इससे उत्साहित होकर भाजपा ने इस बार 12 ईसाई समुदाय के लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है।
पार्टी में नाराजगी भी बढ़ी
12 ईसाई समुदाय के लोगों को मैदान में उतारने से हालांकि पार्टी में नाराजगी बढ़ी है। उसके कई नेताओं ने इस्तीफे भी दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल भी बागी होकर चुनाव मैदान में हैं, लेकिन भाजपा का मानना है कि उसे जीत के लिए सामाजिक समीकरण साधना जरूरी है। और इस लिहाज से उसकी रणनीति सही है। राज्य में भाजपा के लगभग साढ़े तीन लाख सदस्य हैं। इनमें लगभग 18 फीसदी ईसाई हैं। भाजपा को इस समुदाय का भरपूर समर्थन भी मिल रहा है।
अन्य राज्यों की स्थिति अलग
मालूम हो कि अन्य राज्यों में भाजपा को अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुस्लिम वर्ग का समर्थन न के बराबर मिलता है। उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में मुसलमानों के बीच उसको अपनी बात पहुंचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। पूर्वोत्तर में भी ईसाई समुदाय में उसका ज्यादा प्रभाव अभी तक नहीं दिखा है, लेकिन गोवा की राजनीति उसके लिए अलग तरह की है।
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