विश्व
BRICS संसदीय मंच में बड़ा फैसला, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग बढ़ाने का आह्वान
Ratna Netam
27 Oct 2026 4:49 PM IST

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नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। भारत की मेजबानी में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में वैश्विक शांति, बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने वैश्विक चुनौतियों का समाधान आपसी संवाद और सहयोग के जरिए निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंच के लिए प्रस्तावित 'नई दिल्ली संयुक्त घोषणा' में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।यह दो दिवसीय सम्मेलन 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित किया गया। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन में संसदीय कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार पर जोर
ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद में सुधार लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने की मांग इस सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।सितंबर 2026 में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की नई दिल्ली घोषणा में भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधारों का समर्थन किया गया था।उस घोषणा में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रभावी भूमिका देने की आवश्यकता बताई गई थी। रूस और चीन ने भारत तथा ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराया था।
आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की जरूरत
ब्रिक्स संसदीय मंच में आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया गया। सदस्य देशों के बीच आतंकवाद से संबंधित जानकारी साझा करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन से पहले रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में भी आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयासों का मुद्दा उठाया था।ब्रिक्स नेताओं की सितंबर की घोषणा में आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा करते हुए आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।घोषणा में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संयुक्त राष्ट्र संधि को जल्द अंतिम रूप देने की मांग भी शामिल थी।
बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की अपील
सम्मेलन में बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में सभी देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अस्थिरता, क्षेत्रीय संघर्षों और व्यापार संबंधी तनावों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों की आवश्यकता पर चर्चा की।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसदें विभिन्न देशों के बीच समझ और विश्वास बढ़ाने का माध्यम बन सकती हैं। उनके अनुसार, संसदीय संवाद से अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।
ओम बिरला ने संसदीय कूटनीति का महत्व बताया
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसदीय संस्थाओं की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। ये संस्थाएं नागरिकों की आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।उन्होंने ब्रिक्स देशों से साझा प्रतिबद्धताओं को ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में बदलने का आह्वान किया।इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना' रखा गया। इसके अंतर्गत संस्थागत मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर विचार-विमर्श हुआ।
डिजिटल तकनीक और सतत विकास पर भी चर्चा
ब्रिक्स संसदीय मंच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल परिवर्तन और लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई तकनीकों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।सम्मेलन के एजेंडे में संसदीय कामकाज को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने जैसे विषय शामिल रहे।इसके अलावा सतत विकास, संसदीय क्षमता निर्माण तथा विभिन्न देशों की संसदों के बीच सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
भारत की कूटनीतिक भूमिका को मिला महत्व
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन को ब्रिक्स देशों के बीच संसदीय संबंध मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।ब्रिक्स मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को वैश्विक शासन व्यवस्था से संबंधित मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का अवसर प्रदान करता है।नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन ने संयुक्त राष्ट्र सुधार, आतंकवाद विरोधी सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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