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BIG BREAKING: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर 48 घंटे का युद्धविराम

Shantanu Roy
15 Oct 2025 7:21 PM IST
BIG BREAKING: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर 48 घंटे का युद्धविराम
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बड़ी खबर
New Delhi/Islamabad/Kabul. नई दिल्ली/इस्लामाबाद/काबुल। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले एक हफ्ते से जारी तनाव और रुक-रुककर चल रही झड़पों के बीच आखिरकार दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार और अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने स्थानीय समयानुसार बुधवार शाम 6 बजे से अगले 48 घंटे के लिए युद्धविराम लागू करने की घोषणा की है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने सीमा पर सभी सैन्य
गतिविधियों
को रोकने और बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि “यह युद्धविराम हाल के संघर्षों के बाद तनाव को कम करने और राजनयिक संपर्क को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया एक रचनात्मक कदम है।” विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि दोनों पक्ष इस जटिल, लेकिन सुलझने योग्य मुद्दे का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने के लिए गंभीर प्रयास करेंगे। मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, “इस युद्धविराम का उद्देश्य जान-माल की हानि को रोकना और भविष्य के लिए विश्वास बहाली के कदम उठाना है।”


सीमा पर हालिया झड़पें
पिछले एक सप्ताह से अफगानिस्तान और पाकिस्तान की साझा सीमा, विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में गोलीबारी और तोपखाने के हमले की घटनाएं सामने आ रही थीं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगाते रहे हैं। इन झड़पों में अब तक कई नागरिकों और सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों घायल बताए जा रहे हैं। संघर्ष का मुख्य कारण सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों और सीमा निर्धारण से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान से आतंकवादी समूहों द्वारा सीमा पार हमले किए जा रहे हैं, जिनका जवाब देने के लिए पाकिस्तानी बलों को कार्रवाई करनी पड़ती है। वहीं अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान बिना किसी उकसावे के उनके इलाके पर हमले कर रहा है।


संघर्षविराम के बाद संवाद की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 48 घंटे का युद्धविराम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और चीन, लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। चीन ने इस संघर्ष को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए “गंभीर खतरा” बताते हुए कहा कि संवाद और कूटनीति ही इसका समाधान है। पाकिस्तान की ओर से दिए गए आधिकारिक बयान में कहा गया कि “हम अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को महत्व देते हैं। दोनों देशों के बीच स्थिरता और शांति पूरे क्षेत्र के हित में है। पाकिस्तान इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेगा।” वहीं काबुल में तालिबान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी बयान जारी कर कहा कि अफगानिस्तान “अच्छे पड़ोसी संबंधों” के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच विवाद को बातचीत से हल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तालिबान प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि अफगान सीमा से किसी भी तरह की उकसावे की कार्रवाई न हो।


क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह युद्धविराम कायम रहता है, तो दक्षिण एशिया में हाल के वर्षों में देखे गए सबसे गंभीर सीमा संकटों में से एक का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए दोनों देशों से स्थायी शांति के लिए संवाद जारी रखने की अपील की है। भारत और ईरान ने भी इस संघर्ष पर चिंता व्यक्त की है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा पर तनाव का असर पूरे मध्य और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही आतंकवाद और तस्करी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह संघर्षविराम जहां तत्काल राहत लेकर आया है, वहीं यह देखना बाकी है कि दोनों देश आने वाले दिनों में बातचीत की मेज पर किस हद तक रचनात्मक रुख अपनाते हैं।
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