
वर्ल्ड | बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने अपनी सरकार के सातवें कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ ली। इस समारोह में उन्होंने उन सभी आलोचकों का मजाक उड़ाया जो उन्हें "यूरोप का अंतिम तानाशाह" कहकर पुकारते हैं। लुकाशेंको ने चुनावी विवादों और देश में जारी असंतोष के बावजूद अपनी सत्ता को मजबूत करने के इरादे को स्पष्ट किया और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कहा कि वह बेलारूस की स्थिरता और समृद्धि को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आलोचकों और विरोधियों का मजाक उड़ाया
लुकाशेंको ने अपनी शपथ के बाद कहा, "जो मुझे तानाशाह कहकर पुकारते हैं, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि मैं सिर्फ अपने देश की जनता के लिए काम करता हूं।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का कोई असर नहीं है और वे अपनी नीतियों को जारी रखेंगे। उनका यह बयान उन आलोचकों के लिए सीधा संदेश था जो लुकाशेंको के शासन को तानाशाही और लोकतंत्र की अवहेलना मानते हैं।
2020 चुनावों के बाद बढ़ा विरोध
2020 के राष्ट्रपति चुनावों के बाद से लुकाशेंको के खिलाफ बेलारूस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन चुनावों को व्यापक रूप से धोखाधड़ी के रूप में देखा गया था और लाखों नागरिकों ने चुनाव परिणामों के खिलाफ आवाज उठाई थी। लुकाशेंको की जीत को लेकर पश्चिमी देशों ने आलोचनाएं कीं और उन्हें बेलारूस में लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया। हालांकि, लुकाशेंको ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष थे। विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, लेकिन सत्ता के खिलाफ उठी आवाजों को दबाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए।
सत्ता की मजबूत पकड़
लुकाशेंको ने अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए कड़ी नीतियां अपनाई हैं और विपक्षी नेताओं को दबाया है। उनका शासन बेलारूस में एक मजबूत और केंद्रीकृत शक्ति के रूप में कायम रहा है, और उन्होंने हमेशा इसे अपने देश की स्थिरता का आधार बताया है। उनकी सरकार ने विपक्षी नेताओं को जेल में डाला, मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया और विरोध प्रदर्शन को कुचला। इन उपायों के बावजूद, लुकाशेंको ने अपनी अध्यक्षता की शपथ ली और खुद को "बेलारूस के सबसे उपयुक्त नेता" के रूप में प्रस्तुत किया।
भविष्य की दिशा
इस शपथ ग्रहण के बाद लुकाशेंको की राजनीतिक दिशा और सत्ता पर पकड़ को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पश्चिमी देशों द्वारा उनकी सत्ता को मान्यता नहीं मिलने के बावजूद, लुकाशेंको ने अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखा है। बेलारूस के लोग अब भी लुकाशेंको के शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं, लेकिन वह अपनी सरकार के खिलाफ होने वाले विरोध को शांति से दबाने में सक्षम रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या लुकाशेंको अपनी सत्ता को इस तरीके से कायम रख पाते हैं, या फिर देश में एक और राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिलती है।
देश के अंदर और बाहर की प्रतिक्रिया
लुकाशेंको के सत्ता में बने रहने के बाद, बेलारूस के अंदर और बाहर की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है। जहां एक ओर उनके समर्थक उनकी नीतियों और देश में स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्हें समर्थन देते हैं, वहीं विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें तानाशाही शासन का प्रतीक मानते हैं। कुछ पश्चिमी देश उनकी सरकार को मान्यता देने से इनकार कर चुके हैं और बेलारूस पर प्रतिबंध भी लगाए हैं। हालांकि, लुकाशेंको अपनी स्थिति को चुनौती से बचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और अपने आलोचकों को चुनौती दे रहे हैं।





