
x
Delhi दिल्ली। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी वार्षिक भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) 2025 में बांग्लादेश को 100 में से 24 अंक मिले हैं। इस स्कोर के साथ बांग्लादेश दुनिया में 13वें सबसे निचले स्थान पर रहा। यह रैंकिंग 2024 की तुलना में नीचे से गिने जाने पर एक पायदान और नीचे है तथा 2012-2025 की अवधि के औसत स्कोर से दो अंक कम है। दक्षिण एशिया में बांग्लादेश दूसरा सबसे निचला देश बना हुआ है और वह केवल अफगानिस्तान से बेहतर स्थिति में है। 182 देशों की सूची में बांग्लादेश वैश्विक औसत 42 से नीचे स्कोर करने वाले 96 देशों और 50 से कम अंक पाने वाले 122 देशों में शामिल है।
ढाका स्थित दैनिक अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश को “अत्यंत गंभीर भ्रष्टाचार समस्या” वाले देशों में रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष की तुलना में एक अंक की बढ़ोतरी जुलाई आंदोलन की ताकत को दर्शाती है, जिसने कथित ‘क्लेप्टोक्रेसी’ (लूटतंत्र) के पतन और ‘डिक्लेप्टिफिकेशन’ की उम्मीदें जगाईं। हालांकि, परिवर्तन की ठोस नींव रखने और उसे आगे बढ़ाने में विफलता भी साफ नजर आई है।
आंदोलन के बाद भी राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक व प्रशासनिक क्षेत्रों में भ्रष्टाचार जारी रहा। अंतरिम प्रशासन सरकारी पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही का उदाहरण स्थापित करने में असफल रहा, जिससे समग्र स्कोर बेहतर नहीं हो सका। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि नेपाल, लाओस, वियतनाम, तिमोर-लेस्ते, यूक्रेन और अंगोला जैसे कई देश, जो पहले बांग्लादेश के समान या उससे भी नीचे स्कोर करते थे, व्यापक संस्थागत सुधार, सार्वजनिक सेवाओं के डिजिटलीकरण और उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार के प्रभावी अभियोजन के जरिए अपनी स्थिति सुधारने में सफल रहे हैं।
सीपीआई 2025 का वैश्विक संदेश यह है कि दुनिया भर में भ्रष्टाचार की स्थिति बिगड़ रही है, यहां तक कि लोकतंत्र होने का दावा करने वाले देशों में भी। हालांकि सूचकांक यह भी दर्शाता है कि यदि राजनीतिक नेतृत्व इच्छाशक्ति दिखाए, पारदर्शी और जवाबदेह शासन लागू करे, उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करे और मीडिया व नागरिक समाज पर हमले बंद करे, तो सुधार संभव है।
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार व्यापक और रणनीतिक सुधार एजेंडा तय करने में विफल रही है। न तो कोई स्पष्ट कार्यान्वयन योजना बनी, न जोखिम विश्लेषण और न ही जोखिम प्रबंधन रणनीति तैयार की गई। विभिन्न अध्यादेशों के माध्यम से राज्य सुधार की जो नींव रखी गई, वह भी राजनीतिक और नौकरशाही प्रतिरोध तथा ‘चयनात्मक’ दृष्टिकोण के कारण कमजोर हो गई।
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) में भी लगभग कोई ठोस सुधार नहीं हुआ, जिससे उसकी स्वतंत्रता, जवाबदेही और प्रभावशीलता की उम्मीदें अधूरी रह गईं। सरकार पर पारदर्शी और जवाबदेह शासन का वादा पूरा न करने का आरोप भी लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक-प्रशासनिक तंत्र में व्यापक स्तर पर वसूली और दबाव की प्रवृत्ति ने ‘अब हमारी बारी’ जैसी मानसिकता को जन्म दिया है, जो भ्रष्ट तंत्र की जड़ें मजबूत होने का संकेत देती है।
Tagsबांग्लादेशCPI 2025भ्रष्टाचार सूचकांकदक्षिण एशियाट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनलभ्रष्टाचारअंतरिम सरकारACCसंस्थागत सुधारराजनीतिप्रशासनिक भ्रष्टाचारईमानदारीजवाबदेहीजुलाई आंदोलनवैश्विक रैंकिंगभ्रष्टाचार नियंत्रणसरकारी सुधारनौकरशाहीसार्वजनिक सेवाएंवैश्विक औसतअंतरराष्ट्रीय रिपोर्टजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





