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बांग्लादेश ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में रचा इतिहास, रूपपुर प्लांट बिजली उत्पादन के करीब
Ratna Netam
30 Oct 2026 7:24 PM IST

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ढाका। बांग्लादेश ने परमाणु ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट (Rooppur Nuclear Power Plant) की पहली इकाई ने क्रिटिकलिटी की स्थिति सफलतापूर्वक प्राप्त कर ली है। इसका अर्थ है कि रिएक्टर के भीतर पहली बार नियंत्रित और स्वयं चलने वाली परमाणु विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। यह महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि 11 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 34 मिनट पर हासिल हुई थी। इसके बाद रिएक्टर के परीक्षण आगे बढ़ाए गए और शुक्रवार, 30 अक्टूबर को बिजली उत्पादन के परीक्षण चरण की शुरुआत की गई। इस घटनाक्रम से बांग्लादेश अपने पहले परमाणु बिजली संयंत्र से राष्ट्रीय ग्रिड को बिजली आपूर्ति करने के और करीब पहुंच गया है।
रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बांग्लादेश के पाबना जिले के ईश्वरदी क्षेत्र में पद्मा नदी के किनारे स्थित है। इसका निर्माण रूस के सहयोग से किया जा रहा है। परियोजना में रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम और उसकी सहयोगी निर्माण इकाई एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।संयंत्र में दो परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक रिएक्टर की बिजली उत्पादन क्षमता 1,200 मेगावाट है। इस प्रकार दोनों इकाइयों के पूरी तरह चालू होने पर संयंत्र की कुल स्थापित क्षमता 2,400 मेगावाट होगी। यह परियोजना बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा नियामक प्राधिकरण (BAERA) ने 8 अक्टूबर को पहली इकाई में नियंत्रित परमाणु प्रतिक्रिया शुरू करने की अनुमति प्रदान की थी। इसके बाद वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने रिएक्टर की सुरक्षा प्रणालियों, नियंत्रण उपकरणों तथा तकनीकी मानकों की जांच पूरी करते हुए परमाणु प्रतिक्रिया शुरू की।11 अक्टूबर को रिएक्टर ने पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की। बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव मोहम्मद अनवर हुसैन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया था कि रिएक्टर में प्रतिक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हुई और सभी प्रमुख तकनीकी मानक निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए।
परमाणु विज्ञान में क्रिटिकलिटी एक महत्वपूर्ण तकनीकी अवस्था है। जब रिएक्टर के भीतर परमाणु विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉन अगली विखंडन प्रतिक्रियाओं को इस प्रकार बनाए रखते हैं कि प्रतिक्रिया नियंत्रित और स्थिर बनी रहे, तो इसे क्रिटिकल अवस्था कहा जाता है।यहां 'क्रिटिकल' शब्द का अर्थ किसी दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति से नहीं है। यह परमाणु रिएक्टर के संचालन में एक सामान्य और आवश्यक वैज्ञानिक चरण है। इसी प्रक्रिया में उत्पन्न ऊष्मा को बाद में बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है।रूपपुर संयंत्र में रूसी तकनीक पर आधारित VVER-1200 प्रकार के रिएक्टर लगाए गए हैं। ये दबावयुक्त जल रिएक्टर हैं, जिनमें परमाणु विखंडन से प्राप्त ऊष्मा का उपयोग भाप तैयार करने में किया जाता है। भाप टरबाइन को घुमाती है और उससे जुड़े जनरेटर के माध्यम से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
इस उपलब्धि से पहले परियोजना को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। संयंत्र की पहली इकाई में स्वचालित दबाव राहत वाल्व से संबंधित तकनीकी समस्या सामने आने के कारण परीक्षण में देरी हुई थी।रूस से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने स्थानीय इंजीनियरों के साथ मिलकर इस समस्या को दूर किया। इसके बाद सुरक्षा वाल्वों और संबंधित प्रणालियों के विभिन्न परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इन परीक्षणों के आधार पर नियामक प्राधिकरण ने अगले चरण के लिए अनुमति दी।इस बीच 29 अक्टूबर को नियामक प्राधिकरण ने पहली इकाई के पावर स्टार्टअप चरण के लिए 'सी' श्रेणी की अनुमति जारी की। इसके बाद 30 अक्टूबर को प्रयोगात्मक बिजली उत्पादन की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी सामने आई।
अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षणों के बाद बिजली उत्पादन क्षमता धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। योजना के मुताबिक शुरुआती चरण में लगभग 300 मेगावाट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड में भेजी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए अंतिम नियामकीय मंजूरी और आवश्यक परीक्षणों का सफल होना जरूरी है।रूपपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर बताई गई है। यह बांग्लादेश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना से देश की दीर्घकालीन बिजली जरूरतों को पूरा करने और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बांग्लादेश में बिजली उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस, कोयला और अन्य ईंधनों का उपयोग किया जाता है। परमाणु ऊर्जा के शामिल होने से देश को लगातार बिजली उपलब्ध कराने वाला एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है। हालांकि, इसकी आर्थिक उपयोगिता, संचालन लागत, सुरक्षा व्यवस्था और रेडियोधर्मी कचरे का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।रूपपुर परियोजना की दूसरी इकाई पर भी काम जारी है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम ने 29 अक्टूबर को दूसरी इकाई के लिए परमाणु ईंधन की प्रारंभिक आपूर्ति प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी। इससे परियोजना के दूसरे चरण की तैयारियों को गति मिलने की संभावना है।
परमाणु ऊर्जा संयंत्र के संचालन में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक होता है। इसके लिए रिएक्टर के तापमान, दबाव, शीतलन प्रणाली, विकिरण स्तर और आपातकालीन सुरक्षा उपकरणों की लगातार निगरानी की जाती है।बांग्लादेश के अधिकारियों के अनुसार, बिजली आपूर्ति शुरू करने से पहले शेष परीक्षणों और मंजूरियों को पूरा किया जाएगा। नियामक प्राधिकरण ने संकेत दिया है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी होने पर अगले कुछ सप्ताह में परीक्षण के तौर पर राष्ट्रीय ग्रिड को बिजली दी जा सकती है।फिलहाल रूपपुर परमाणु संयंत्र की पहली इकाई का क्रिटिकलिटी हासिल करना और पावर स्टार्टअप चरण में प्रवेश करना बांग्लादेश के ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, क्रिटिकलिटी प्राप्त करने का अर्थ नियमित व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू होना नहीं है। संयंत्र के पूर्ण परिचालन के लिए अभी आगे की तकनीकी और नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
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